रोज घर वालों से बात करता हूं। हालचाल ठीक बताते हैं तो संतोष मिल जाता है। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नियम-कानून में बदलाव तो होंगे ही, पता नहीं कौन कानून लागू हों, ऐसे में चिंता भविष्य की भी सता रही है।
जब यहां से कोर्स करके घर लौटूंगा, तब पता नहीं नौकरी मिले न मिले। यह कहना है चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के इंटरनेशनल हॉस्टल में रह रहे अफगानी छात्र सलीम का। सलीम इन दिनों दहशत में है।
एमएससी एग्रोनामी द्वितीय वर्ष के छात्र सलीम ने बताया कि उसका घर काबुल से 30 किमी दूर मेडनवर्डक में है। उसने बताया कि घर में फिलहाल सब कुछ ठीक है। धीरे-धीरे बाजार खुलने लगे हैं। समाचारों में वहां की तस्वीरें देखकर डर लगता है। संतोष इतना ही है कि घर वाले ठीक हैं। अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान के तीन छात्र यहां आए थे।