निमग्दा गिरोह का सरगना है। क्राइम ब्रांच ने जब उनसे पूछताछ की और गिरोह का आपराधिक इतिहास निकाला तो बड़ा तथ्य सामने आया। जानकारी मिली कि 2020 में हैदराबाद में दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की अलग-अलग हादसों में मौत हो गई थी। जानकारी होते ही निमग्दा ने अपने पांच साथियों के साथ साजिश रची और इन इंजीनियरों के नाम से 50-50 लाख रुपये का लोन निजी बैंक से ले लिया था।
इस तरह किया था पूरा खेल, आठ खाते सीज कराए गए
क्राइम ब्रांच के मुताबिक इंजीनियरों की मौत की खबर जब गिरोह को लगी तो उनके बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। सोशल मीडिया और जिस कंपनी में वे काम करते थे उसकी वेबसाइट से दोनों के बारे में ठगों ने जानकारी जुटाई।
नाम, पता, ईमेल व मोबाइल नंबर मिलने के बाद उसका आधार कार्ड निकलवाया, जिसमें निमग्दा ने अपनी फोटा लगाई। उसके बाद निजी बैंकों से 50-50 लाख रुपये का लोन ले लिया। आरोपियों का जब आपराधिक इतिहास निकाला गया तब इसकी जानकारी हुई। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के आठ बैंक खाते सीज कराए हैं, जिनमें वर्तमान में कुल पांच लाख रुपये हैं। ठगों ने मोटी रकम रियल इस्टेट व अन्य धंधों में लगा रखी है। कानपुर पुलिस हैदराबाद पुलिस से एफआईआर की कॉपी और अन्य दस्तावेज ले आई है।