शुद्ध बुद्धि कामधेनु रूपी होती है। इसका उपयोग परोपकार और धर्म के उत्थान के लिए ही करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को संयम, संस्कार और भारतीय संस्कृति का पालन करना चाहिए। मर्यादा महोत्सव के चौथे दिन बुधवार को आचार्य श्री महाश्रमण ने यह बात कही।
बुद्धि सम्मेलन में आचार्य श्री ने नशामुक्त समाज का निर्माण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है। देश की युवा पीढ़ी को डस रहे नशे को हमें मिलकर जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
तभी एक स्वस्थ समाज और विकसित देश की कल्पना साकार हो सकती है।
बच्चों ने नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश
महोत्सव में ज्ञानशाला के बच्चों ने लघु नाटिका के जरिए नशामुक्ति का संदेश दिया। नाटक के माध्यम से बच्चों ने बताया कि संयम और अनुशासित दिनचर्या से किस तरह नशे से दूर रहा जा सकता है।
बच्चों ने नशे की बुराइयों को प्रस्तुत कर लोगों से सिगरेट, गुटखा और शराब आदि नशे से दूर रहने की अपील की।