खुशी दुबे को घटना के बाद गिरफ्तार कर माती जेल की महिला बैरक में दो महीने तक रखा गया था, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड से नाबालिग होने की पुष्टि के बाद उसे बाराबंकी के बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया। बालिग होने पर खुशी का ठिकाना फिर से महिला बैरक बन गया है।
बिकरू कांड के बाद पुलिस मुठभेड़ में ढेर आरोपी अमर दुबे की पत्नी खुशी की रात करवट बदलते कटी। तरोई की सब्जी, रोटी और चावल खाने के बाद उसे बैरक में भेज दिया गया था। सुबह भी उसने बैरक की अन्य महिला बंदियों से बात नहीं की।
विज्ञापन
जेलर कुश कुमार ने बताया कि महिला बैरक में खुशी सामान्य है। रविवार को उसे सुबह की चाय, दोपहर व शाम का भोजन दिया गया। बालिग होने पर खुशी को बाराबंकी के किशोरी संरक्षण गृह से माती जेल शिफ्ट किया गया है।
पहले भी दो महीने खुशी का ठिकाना रही महिला बैरक
खुशी दुबे को घटना के बाद गिरफ्तार कर माती जेल की महिला बैरक में दो महीने तक रखा गया था, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड से नाबालिग होने की पुष्टि के बाद उसे बाराबंकी के बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया। बालिग होने पर खुशी का ठिकाना फिर से महिला बैरक बन गया है।