हवेली में जमीन पर बैठकर गांधी ने किया था भोजन
उन्होंने ने बताया कि पहली बार राठ कस्बे में महात्मा गांधी के आगमन पर क्षेत्रीय लोगों ने उन पर फूल बरसाए थे। गांधी ने हमारी हवेली में रात्रि विश्राम किया था। महात्मा गांधी ने हवेली के अंदर बरामदे में जमीन पर बैठकर सभी के साथ भोजन किया था। यह बरामदा आज भी उसी स्थिति में बना है, जबकि हवेली खंडहर में तब्दील हो गई है।
नमक सत्याग्रह आंदोलन में 372 लोग गए थे जेल
गांधी के जाते ही नमक सत्याग्रह आंदोलन का आगाज राठ कस्बे से हुआ था। पं. बैजनाथ तिवारी को कानून का उल्लंघन करने पर गिरफ्तार कर छह माह की सजा देते हुए बांदा जेल भेजा गया था। पुलिस ने आंदोलन करने वालों पर डंडे बरसाए थे। बताया कि आंदोलन में 372 लोगों को कारावास की सजा और जुर्माना भी किया गया था।
दो दिन नहीं जले थे चूल्हे
अजय अग्रवाल ने बताया उनकी चाची कृष्णा देवी का मायका हरपालपुर में है। कृष्णा देवी के पिता विश्वनाथ गांधी जी के करीबी थे। जब कृष्णा 10 साल कीं थीं तब उनके पिता का गांधी जी से मिलना जुलना था। बताया गांधी जी की हत्या पर पूरा परिवार फूट-फूट कर रोया था। उनके घर में दो दिन तक चूल्हा नहीं जला था।