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स्वतंत्रता दिवस 2023: तिरंगा हटाने में छूट गया था अंग्रेजी फौज का पसीना, क्रांतिकारियों का तीर्थ है जराखर गांव

Tue, 15 Aug 2023 09:49 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

Independence Day 2023:  मुगल सेना पन्ना के महाराज छत्रसाल को पराजित करने जा रही थी। जराखर गांव के पास डेरा डाले सेना पर गांव के युवाओं ने हमला बोल दिया। अंधेरी रात में मुगलों के रक्त की प्यासी तलवारें चमक उठीं। जराखर के युवाओं ने मुगल सेनापति का सिर धड़ से अलग कर महाराज छत्रसाल को भेंट किया।
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जराखर गांव का वह स्थान जहां झंडा फहराने पर अंग्रेजी सेना ने काट दिया था पेड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वीर भूमि जराखर में आजादी के दीवाने तिरंगा फहराने की जिद पर अड़े थे। जिस पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर तिरंगा लहराता था, अंग्रेज अफसरों ने उसे ही कटवा दिया। क्रांतिकारियों को अमानवीय यातनाएं दीं। फिर भी आजादी के दीवानों को तिरंगा फहराने से रोकने में नाकाम रहे।

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महान क्रांतिकारी श्रीपत सहाय रावत की जन्म भूमि जराखर गांव को अंग्रेजी सरकार ने राजद्रोही घोषित कर दिया। गांव पर पुलिस दल की निगरानी रहती थी। ग्रामीण झंडा लगाते और अंग्रेज उसे उतारने में लगे रहते थे। जराखर के क्रांतिकारी पंचम लुहार गांव गांव जाकर तिरंगा जुलूस निकालते थे।
अंग्रेजी सरकार ने उन्हें पकड़ लिया। हाथ पैर बांध कर अरहर के खेत में पटक दिया। एक सिपाही उनकी छाती पर चढ़ गया। बाकी सिपाहियों ने हाथ पैरों में बंधी रस्सियों के सहारे पूरे खेत में उन्हें घसीटा। बबूल की कंटीली झाड़ियों से पीटा। अमानवीय यातनाएं भी पंचम लुहार का हौसला नहीं तोड़ पाईं।

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रामदयाल कोरी को दीं गईं अमानवीय यातनाएं
एक रात क्रांतिकारी रामदयाल कोरी ने पीपल के वृक्ष की सबसे ऊंची व पतली डाल पर तिरंगा फहरा दिया। पेड़ की डाल इतनी पतली थी कि उस पर चढ़कर झंडा उतारना संभव नहीं था। आखिर थक कर अंग्रेज अफसरों ने उस पेड़ को ही काट डाला। वहीं रामदयाल कोरी को जेल भेज कर अमानवीय यातनाएं दीं गईं।

महाराज छत्रसाल ने दी थी रावत की उपाधि
मुगल सेना पन्ना के महाराज छत्रसाल को पराजित करने जा रही थी। जराखर गांव के पास डेरा डाले सेना पर गांव के युवाओं ने हमला बोल दिया। अंधेरी रात में मुगलों के रक्त की प्यासी तलवारें चमक उठीं। जराखर के युवाओं ने मुगल सेनापति का सिर धड़ से अलग कर महाराज छत्रसाल को भेंट किया।

राजा गद्दी छोड़कर रावत का सम्मान करे
उनकी बहादुरी से खुश होकर छत्रसाल ने ग्रामीणों को रावत (बहादुर) की उपाधि दी। खिलत सेला मण्डील और खड़ी ताजीम की प्रतिष्ठा बख्शी। इसका अर्थ था जब भी जराखर निवासी पन्ना के दरबार में पहुंचें, तो राजा गद्दी छोड़कर रावत का सम्मान करे।

इन 52 क्रांतिकारियों ने जंगे आजादी में दिया योगदान
श्रीपत सहाय रावत, शांतिदेवी, राजाबेटी रावत, आनंदी लाल, हरनाथ सिंह, सुखलाल, भोजराज, सुंदरीदेवी, जियालाल, चंद्रभान, घनश्याम, देव जू, कुंजबिहारी, गोरेलाल, सुखलाल, झुन्नूलाल, ईश्वरानंद दास, गयादीन, हीरामन, मुरलीधर, रामदयाल, मूलचंद्र, जगरूप, जियालाल, झुम्मकलाल, नाथूराम, रामसेवक शामिल रहे।
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इसके अलावा राजा बेटी, प्रताप सिंह, किशोर सिंह, रामनारायण, खुरखर, भद्दी, सुम्मेरा, कुंजबिहारी, इंद्रजीत, कीरत सिंह, पंचम लुहार, रामदयाल, जगन्नाथ, बैजनाथ, गोरेलाल, जगन्नाथ, मटोला, दिल्लीपत सिंह, रामलाल, दसईं महतों, देशरानी, परमा, रामभरोसे, राजाराम चतुर्वेदी ने जंगे आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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