फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur: 60% रोगियों के कंधे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से जाम, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में निकला निष्कर्ष

Sat, 13 Jul 2024 12:18 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों में सबसे पहले कंधे की एमआरआई जांच की जा रही है। कंधे में बीमारी का कारण ढूंढा जा रहा है। अगर कंधे में कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी कंधा जाम है तो गर्दन का एमआरआई करा रहे हैं, तो 60 प्रतिशत रोगियों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कंधे का पता चला है।
विज्ञापन
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने कंधा जाम यानी फ्रोजन शोल्डर का मुख्य कारण ढूंढ लिया है। बीते छह माह में यहां पर फ्रोजन शोल्डर के 50 रोगियों पर अध्ययन किया गया तो पता चला कि इनमें से 60 प्रतिशत यानी 30 रोगियों को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है। इस कारण से इन्हें हाथ उठाने में तकलीफ और दर्द हो रहा है। ये सभी मरीज ओपीडी में दिखाने आए थे।

विज्ञापन

फ्रोजन शोल्डर की वजह जानने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पहली बार अध्ययन किया जा रहा है। हैलट के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पेन मेडिसिन विभाग में छह महीने पहले अध्ययन शुरू हुआ था। करीब तीन साल तक चलने वाले इस अध्ययन में अभी 300 रोगियों को और शामिल किया जाएगा। विभाग के नोडल डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि फ्रोजन शोल्डर तीन से छह साल तक बना रहता है। दबने के कारण नसों के सूजने से यह समस्या होती है। जब नसों में सूजन कम होती है, तो यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है।
उन्होंने बताया कि कई रोगियों को ज्यादा दिक्कत होती है तो उनका रेडियोफ्रीक्वेंसी से इलाज किया जाता है। अध्ययन में नया कारण सामने आने के बाद अब रोगियों को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का परीक्षण कराने की सलाह दी जाएगी। साथ ही बहुत देर तक गर्दन आगे झुकाने के लिए भी मना किया जाएगा। जिन रोगियों को ज्यादा समस्या होगी, उनके गर्दन की ब्लॉक नसों को सलाई डालकर खोलने की नई तकनीक भी प्रयोग में लाई जाएगी। अध्ययन पूरा होने के बाद ही फ्रोजन शोल्डर के इलाज का नया प्रोटोकॉल तैयार हो सकेगा।

विज्ञापन

ऐसे किया जा रहा अध्ययन
डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों में सबसे पहले कंधे की एमआरआई जांच की जा रही है। कंधे में बीमारी का कारण ढूंढा जा रहा है। अगर कंधे में कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी कंधा जाम है तो गर्दन का एमआरआई करा रहे हैं, तो 60 प्रतिशत रोगियों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कंधे का पता चला है।

विज्ञापन

इन बातों का रखें ध्यान
गर्दन झुकाकर बैठने और घंटों मोबाइल चलाने की आदत से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी बढ़ती जाती है। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे फ्रोजन शोल्डर की समस्या भी बढ़ती जाती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें