खानचंद्रपुर में क्रोमियम सल्फेट का सैंपल लेते प्रशिक्षु वैज्ञानिक। (संवाद)
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कानपुर देहात। देश के पंद्रह राज्यों से आए 27 प्रशिक्षु वैज्ञानिक बी (हाइड्रोजियोलॉजिस्ट) की टीम ने मंगलवार को खानचंद्रपुर में क्रोमियम सल्फेट व दूषित भूजल के सैंपल लिए। इसके साथ ही क्रोमियम के दुष्प्रभाव का जायजा लिया। प्रशिक्षु वैज्ञानिक चार माह के प्रशिक्षण के दौरान भ्रमण पर आए हैं।
जुलोजी, केमिस्ट्री या फिर जियोफिजिक्स से एमएससी उत्तीर्ण छात्र यूपीएससी के तहत जीएसआई (जियोलॉजिस्ट) परीक्षा में प्रतिभाग करते हैं। इस परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र प्रशिक्षु वैज्ञानिक बी बनते हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर में राजीव गांधी राष्ट्रीय भूजल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षु वैज्ञानिकों को चार माह का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इसके बाद इनकी हाइड्रोजियोलॉजिस्ट पद पर तैनाती होती है। रायपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान से राजस्थान, असम, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड समेत 15 राज्यों के 27 प्रशिक्षु वैज्ञानिक मंगलवार को खानचंद्रपुर पहुंचे। यहां फील्ड ट्रेनिंग के तहत इन प्रशिक्षुओं को दूषित भूजल व क्रोमियम सल्फेट का सैंपल लेने का तरीका बताया गया। यहां इन्होंने दूषित भूजल से होने वाले दुष्प्रभाव का भी जायजा लिया।
ट्रेनर रायपुर संस्थान के डॉ. टीवीएन सिंह, पीके सिंह, राजीव रंजन शुक्ला के साथ केंद्रीय भूजल बोर्ड उत्तरी क्षेत्र लखनऊ के डॉ. केएस राना, डॉ. टीके पंत, डॉ. सुधीर श्रीवास्तव रहे।
वरिष्ठ जल वैज्ञानिक टीके पंत ने बताया कि प्रशिक्षु वैज्ञानिकों को पंद्रह दिन की ट्रेनिंग के लिए लखनऊ रीजनल ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया है। इसी के तहत मंगलवार को इन प्रशिक्षु वैज्ञानिकों को फील्ड ट्रेनिंग दी गई। क्रोमियम सल्फेट व भूजल के सैंपल का लखनऊ की लैब में परीक्षण किया जाएगा।