चार-चार सौ रुपये की दवाएं भी मंगाई गईं। इसमें उसका 20 हजार रुपये खर्च हुआ, लेकिन बच्चे को पूरा आराम नहीं मिला। इसके बाद में प्लास्टिक सर्जरी करवाने के लिए उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। उसका कहना है कि उसे पता ही नहीं था कि हैलट के सर्जरी विभाग में भी प्लास्टिक सर्जन तैनात हैं।
हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या का कहना है कि रेफर क्यों किया, इसकी जानकारी नहीं है। दवाएं महंगी होती हैं, कहां कितने की दवा मिलती है, इसका पता नहीं है। फिर भी मामले की जानकारी की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।