चौबेपुर (बिल्हौर)। क्षेत्र के दिलावरपुर टोसवा गांव के पास खेत में बुधवार की सुबह ऑस्ट्रेलियन प्रजाति का एमू पक्षी पर आवारा कुत्ते हमला कर रहे थे। खेत पर मौजूद ग्रामीण ने एमू को कुत्तों से बचा कर घर ले आया। गांव में विचित्र पक्षी को देखकर किसी ने पुलिस और वन अधिकारियों को सूचना दे दी। मौके पर पुलिस और प्राणी उद्यान, कानपुर के वन अधिकारी पहुंचे। उन्होेंने इसे पालतू पक्षी बता कर ग्रामीणों की जिज्ञासा खत्म की और एमू को उसके पालक के सुपुर्द कर दिया।
चौबेपुर कस्बे के दिलावरपुर टोसवा गांव निवासी संजय यादव बुधवार की सुबह खेत पर गए थे। वहां पर विशाल पक्षी को आवारा कुत्ते नोचने का प्रयास कर रहे थे। संजय ने किसी तरह कुत्तों से बचाकर घर ले आए। गांव में विचित्र पक्षी को देखकर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। तभी किसी ने सूचना पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को दी। चौबेपुर पुलिस के अलावा कानपुर प्राणी उद्यान से दिलीप कुमार गुप्ता और वन अधिकारी मुकेश कुमार मौके पर पहुंचे। वन अधिकारियों ने उक्त पक्षी को प्रदेश में इसके पालन को बढ़ावा देने की बात ग्रामीणों को बताई। जानकारी हुई कि शिवली के पास मकरंदापुर गांव, कानपुर देहात निवासी बाबू तिवारी के यहां दो एमू पक्षी पले हैं।
वन अधिकारियों ने बताया कि मुर्गी पालन की तरह एमू पालन पर सरकार द्वारा जोर दिया जा रहा है। स्वरोजगार के तौर पर सरकार इसे बढ़ावा दे रही है। बताया कि पक्षी के एक अंडे की कीमत ही पांच हजार तक होती है, जबकि पक्षी के मरने के उपरांत भी इसकी कीमत बनी रहती है। बाजार में इसका गोश्त काफी महंगा बिकता है। इसके चमड़े से सजावटी वस्तुएं तैयार की जाती है। चर्बी से औषधि तैयार होती है। वन अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि जांच पड़ताल के बाद शुतुरमुर्ग प्रजाति के एमू पक्षी को उसके मालिक के सुपुर्द कर दिया गया है।