हैलट में मेडिसिन विभाग के बगल में 100 बेड की कार्डियक यूनिट बनने जा रही है। यह यूनिट वार्ड नंबर नौ से मिली रहेगी। वैसे तो हैलट में हृदय रोगियों का इलाज होता है। यूनिट बन जाने से ज्यादा सुविधाएं मिलने लगेंगी।
कानपुर के हैलट अस्पताल में इलाज कराने वाले रोगियों को अगर हृदय की समस्या हो जाती है तो उन्हें कार्डियोलॉजी शिफ्ट नहीं करना पड़ेगा। उन्हें हैलट में ही हृदय का भी इलाज मिल जाएगा। इसके साथ ही सर्जरी के रोगियों को ऑपरेशन के पहले कार्डियोलॉजी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
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दरअसल, हैलट में मेडिसिन विभाग के बगल में 100 बेड की कार्डियक यूनिट बनने जा रही है। यह यूनिट वार्ड नंबर नौ से मिली रहेगी। वैसे तो हैलट में हृदय रोगियों का इलाज होता है। यूनिट बन जाने से ज्यादा सुविधाएं मिलने लगेंगी। हैलट में भर्ती निमोनिया, सेप्सिस और दूसरे रोगों के रोगियों को इलाज के दौरान हृदय की भी समस्या पैदा हो जाती है।
इसके अलावा हृदय रोगी भी भर्ती रहते हैं। हालत बिगड़ने पर इन्हें कार्डियोलॉजी शिफ्ट करना पड़ता है, जिससे रोगियों को परेशानी होती है। इसके अलावा कार्डियोलॉजी में बेड भर जाने पर रोगियों को हैलट शिफ्ट किया जाता है। नई यूनिट से यह समस्या खत्म होगी। कोरोना काल में हृदय रोगियों को संक्रमण होने पर हैलट शिफ्ट किया जाता था।
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कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाती थी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि हैलट के लिए कार्डियक यूनिट की अनुमति मिल गई है। यह यूनिट छह महीने में शुरू हो जाएगी। इसमें 30 फीसदी हिस्सा राज्य और 70 फीसदी केंद्र सरकार का रहेगा।