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UP News: विदेश में नौकरी लगवाने का झांसा दे 10 करोड़ ठगे, नाइजीरियन समेत चार गिरफ्तार

Wed, 27 Jul 2022 09:34 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के चार आरोपियों को क्राइम ब्रांच के गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने जाजमऊ निवासी एक इंजीनियर को भी शिकार बना पांच लाख रुपये ऐंठे थे। बता दें कि गिरोह ई-मेल के जरिये नौकरी का ऑफर भेजता था और जाल में फंसा किश्तों में रकम वसूलता था।
 
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साइबर ठगी के आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में क्राइम ब्रांच ने बुधवार को विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का राजफाश कर एक नाइजीरियन समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। नाइजीरियन का गिरोह पिछले एक से डेढ़ वर्षों में करीब दस करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। गिरफ्तार आरोपियों को दोपहर बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां वह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। क्राइम ब्रांच गिरोह से जुड़े अन्य शातिर साइबर ठगों को ट्रेस करने की जद्दोजहद में जुटी है।

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डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि दिल्ली के चंदेर नगर निवासी नाइजीरियन मोसेस के अलावा इटावा निवासी वीरपाल व उसके सगे भाई अमन हरियाणा के आदर्शन गर इलाके के रहने वाले शान खान को गिरफ्तार किया गया है। ठगी का मास्टरमाइंड मोसेस है। अन्य तीनों आरोपियों के खातों में रकम जमा कराई गई थी। पुलिस ने जब खाते खंगाले तो इन तीनों के खातों में पिछले कुछ महीने में करीब 50-50 लाख रुपये का लेनदेन सामने आया है। क्राइम ब्रांच का दावा है कि पिछले डेढ़ वर्षों में नाइजीनियर गिरोह ने सैकड़ों लोगों से तकरीबन दस करोड़ की ठगी की।

इस तरह से गिरोह तक पहुंची क्राइम ब्रांच
जाजमऊ निवासी दीप मंडल चैन्नई में एक कंपनी में प्रोडक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले साल एक जून को उनको एक ईमेल मिला था। जिसमें दावा किया गया था वह अमेरिका की बड़ी मोबिल कंपनी एक्जॉन मोबिल के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी का है। ई-मेल के जरिये अमेरिका में नौकरी का ऑफर दिया गया था। दीप उसके झांसे में आ गए।

पासपोर्ट समेत अन्य सभी दस्तावेज उसको ईमेल किए। उसके बाद पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर 12 हजार 850 रुपये दिए। उसके बाद कई किश्तों में करीब पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। तब उनको ठगी का एहसास हुआ। तब केस दर्ज कराया था। साइबर टीम ने जांच की। सर्विलांस व आईपी एड्रेस की मदद से जानकारी जुटाई। जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई थी उस तक पहुंचे, जिसके बाद पूरे मामले का राजफाश हुआ।
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वीजा खत्म फिर भी देश में जमे नाइजीरियन
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि मोसेस करीब दो साल पहले मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद वह यहां रह रहा था। यह शातिर ठग है। उसके गिराह में तमाम नाइजीरियन हैं। पुलिस ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय को जानकारी दे दी है, जिसके जरिये नाइजीरिया एम्बेसी को जानकारी दी गई है।
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