इस तरह से गिरोह तक पहुंची क्राइम ब्रांच
जाजमऊ निवासी दीप मंडल चैन्नई में एक कंपनी में प्रोडक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले साल एक जून को उनको एक ईमेल मिला था। जिसमें दावा किया गया था वह अमेरिका की बड़ी मोबिल कंपनी एक्जॉन मोबिल के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी का है। ई-मेल के जरिये अमेरिका में नौकरी का ऑफर दिया गया था। दीप उसके झांसे में आ गए।
पासपोर्ट समेत अन्य सभी दस्तावेज उसको ईमेल किए। उसके बाद पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर 12 हजार 850 रुपये दिए। उसके बाद कई किश्तों में करीब पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। तब उनको ठगी का एहसास हुआ। तब केस दर्ज कराया था। साइबर टीम ने जांच की। सर्विलांस व आईपी एड्रेस की मदद से जानकारी जुटाई। जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई थी उस तक पहुंचे, जिसके बाद पूरे मामले का राजफाश हुआ।
वीजा खत्म फिर भी देश में जमे नाइजीरियन
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि मोसेस करीब दो साल पहले मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद वह यहां रह रहा था। यह शातिर ठग है। उसके गिराह में तमाम नाइजीरियन हैं। पुलिस ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय को जानकारी दे दी है, जिसके जरिये नाइजीरिया एम्बेसी को जानकारी दी गई है।