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एक माह पहले ही वतन वापसी की राह पर चले परिंदे ..............

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kannauj,kannauj news - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। मौसम में आए एकाएक बदलाव के चलते एक माह पहले ही विदेशी मेहमान पक्षियों ने अपने वतन की राह पकड़ ली है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, चीन, साइबेरिया, सेंट्रल यूरोप और पाकिस्तान समेत सेंट्रल एशिया से आने वाले करीब 30 हजार पक्षी अमूमन मार्च तक लाख बहोसी पक्षी विहार में डेरा डाले रहते थे। इस बार फरवरी के पहले हफ्ते से ही इनका पलायन शुरू हो गया है।
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लाख बहोसी पक्षी विहार के वन जीव रक्षक ज्ञान सिंह पटेल का कहना है कि पारा चढ़ने की वजह से विदेशी पक्षी समय से पहले ही अपने वतन लौटने लगे हैं। इनके मार्च के अंतिम सप्ताह तक रुकने की उम्मीद थी, मगर धीरे-धीरे पक्षी पलायन करने लगे हैं। वन जीव गार्ड करन सिंह ने बताया कि अभी ज्यादातर यूरोप से आने वाली शोवलर, अमेरिका से आने वाली पिंटेल, मलाई और चीन से आने वाली कूट चिड़ियाें ने वतन की वापसी की है। करन का कहना है कि इसके बावजूद अभी बड़ी तादात में प्रवासी और अप्रवासी पक्षी झील में मौजूद हैं।
फ्लेमिंगो का इंतजार
अचानक मौसम में आए बदलाव के साथ फ्लेमिंगो जैसे कई पक्षी लाख बहोसी की झील में दस्तक दे सकते हैं। फरवरी के पहले सप्ताह में आने वाले इन पक्षियों का सभी को बेसब्री से इंतजार है। ये विदेशी मेहमान गर्मी के मौसम में पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं। इन्हें देखने के लिए सैलानी दूर-दूर पक्षी विहार आते हैं।
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80 वर्ग किमी में फैला पक्षी विहार
मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर लाख बहोसी पक्षी विहार है। यह 80 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ पर्यटक स्थल है। इसमें लाख और बहोसी नाम से दो बड़ी झीलें हैं। लाख झील में 150 एकड़ और बहोसी में 270 एकड़ में पानी भरा हुआ है। निचली गंग नहर के पानी से इन झीलों में पांच से 10 फीट तक पानी भरा है।
झुंड बनाकर भरते उड़ान
सर्दी के मौसम में हजारों की तादात में प्रतिवर्ष प्रवासी और अप्रवासी झील में आते हैं। ये पक्षी विदेशों से झुंड प्रवास के स्थान पर आते हैं। वार हेडिड गूज प्रजातियों के पक्षी तो 15-20 दिन तक लगातार उड़ान भरकर आते हैं।
साइबेरिया से आते हैं ज्यादातर पक्षी
साइबेरिया देशों में दिसंबर से मार्च तक तापमान लगभग शून्य से 20 डिग्री तक नीचे चला जाता है। वहां ताल, नदियां, झीलें सब बर्फ के रूप में तब्दील हो जाती हैं। ऐसे में पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ जाता है। इस वजह से पक्षी यहां आ जाते हैं।
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