नगर के सौरिख रोड पर कालिकादेवी मंदिर के सामने बटेश्वरदयाल महाविद्यालय में चल रही दुर्लभ सत्संग और श्रीराम कथा महा-महोत्सव के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह की कथा का संगीतमय वर्णन किया गया। कथा के दौरान निकाली गई शंकर जी की बारात को देख लोग झूम उठे। कथा पांडाल में मौजूद महिलाओं ने दूल्हा बने शंकर पर पुष्प वर्षा की।
श्रीगोविंद सतसाहित्य प्रचार समिति एवं प्रभात फेरी मंडल द्वारा चल रही श्रीराम कथा में ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी बाल संत भोले बाबाजी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बेटी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेटा केवल एक कुल को, जबकि बेटी दो कुल का उद्धार करती है।
जितनी सेवा माता-पिता की बेटी करती है बेटा उतनी सेवा कभी नहीं कर सकता। उन्होंने लिंग परीक्षण को महाअपराध और पाप की संज्ञा दी। कहा कि जब बेटी ही नहीं होगी तो आगे समाज की कल्पना कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद जब बेटी की विदा करते हैं तब मां ही नहीं पिता की भी आंखे नम हो जाती हैं।
बेटी के बाद घर सूना-सूना हो जाता है। संत भोले बाबा ने इससे पूर्व शिव पार्वती विवाह की कथा का वर्णन किया। इस दौरान आई शिव जी की बरतिया हिमाचल नगरी भजन पर जैसे ही दूल्हा बने शंकर अपने भूत पिशाच और गणों के साथ बारात लेकर जैसे ही कथा पंडाल में पहुंचे वैसे ही लोग उन्हें देख झूम उठे। महिलाओं ने उन पर पुष्प वर्षा की। इस दौरान राजा हिमांचल, रानी मैना, पार्वती, गणेश जी, विष्णु, नारद और दूल्हा बने भगवान शंकर की झांकी देख लोग भावविभोर हो उठे।