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सीबीएसई इंटर में लड़कियों ने फिर बाजी मारी

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श्रेया को मिठाई खिलाते पिता आलोक। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने शुक्रवार को 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। बारहवीं में इस बार भी लड़कों की अपेक्षा लड़कियों ने बाजी मारी है। जिले के आठ स्कूलों का रिजल्ट शुक्रवार को आ गया। जेपी स्कूल गुरसहायगंज और आशा पब्लिक स्कूल तिर्वा का रिजल्ट अब दूसरे चरण में आएगा। जिले में अभी तक कोई भी फेल नहीं हुआ है। जो छात्र नंबर से संतुष्ट नहीं हैं, वह संबंधित विषय में पूरक परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह परीक्षा 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच होगी।
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कोरोना काल को देखते हुए बोर्ड ने इस साल 12वीं का रिजल्ट 30:30:40 के फॉर्मूले पर बनाया है। इस फॉर्मूले में 10वीं और 11वीं के पांच में से जिन तीन सब्जेक्ट में स्टूडेंट्स ने सबसे ज्यादा स्कोर किया था, उन्हीं को रिजल्ट तैयार करने के लिए चुना गया। वहीं, 12वीं के यूनिट, टर्म और प्रैक्टिकल एग्जाम में मिले अंकों के आधार पर रिजल्ट तैयार किया गया। पिछले साल 13 जुलाई को रिजल्ट आया था। इस बार पूरे 17 दिन लेट घोषित हुआ है।
वहीं दूसरी ओर छात्र-छात्राओं के एक पक्ष का कहना रहा कि ग्रेडिंग सिस्टम से प्रतिभाओं को वह ऊंची उड़ान नहीं मिल सकी जो वह अपनी तैयारी के बल पर प्राप्त कर लेते थे।
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टॉपर छात्रों से बात
हर्ष सामवेदी
जेपीएस के टॉपर हर्ष ने बताया कि स्कूल की पढ़ाई में सीधे टीचर से जुड़ते हैं। समस्या वहीं हल हो जाती है। ऑनलाइन में नेटवर्क की समस्या होती है। ऑनलाइन पढ़ाई में किसी समस्या को हल करने में दिक्कत होती है। 10 वीं में 96.4 प्रतिशत नंबर मिले थे। 11 वीं में भी अच्छा नंबर मिले। ग्रेडिंग सिस्टम में 97.60 प्रतिशत नंबर मिले हैं। परीक्षा होती तो इससे अधिक नंबर मिल सकते थे। बीबीए कर एमबीए करने का लक्ष्य है।
रोहन
जेपीएस के सेेकेंड टॉपर रोहन ने बताया कि प्री बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे नंबर मिले हैं। इसमें अच्छे नंबर मिलने के लिए आश्वस्त थे। ऑनलाइन पढ़ाई से किसी टॉपिक को लेकर समस्या होने पर हल करने में दिक्कत होती है। स्कूल में पढ़ाई करने से टीचर के सामने समस्या हल हो जाती है। नीट की तैयारी करके आगे डॉक्टर बनने का लक्ष्य है।
श्रेया श्रीवास्तव
सेंट जेवियर्स की टॉपर श्रेया ने बताया कि ग्रेडिंग सिस्टम से पढ़ाई का सही तरह से मूल्यांकन नहीं हो पाता है। परीक्षा देने से समय मिल जाता है। अपना मूल्यांकन भी हो जाता है। ऑनलाइन में पढ़ाई में समस्याएं हल नहीं हो पातीं। ऑफलाइन में टीचर के सामने सारे कांसेप्ट क्लियर हो जाते हैं। कोरोना काल में डॉक्टरों की कमी थी। डॉक्टर बनना लक्ष्य है।
शिवम प्रजापति
सेंट जेवियर्स के सेकेंड टॉपर शिवम ने बताया कि कोरोना काल को देखते हुए ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया है। प्री बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छा नंबर आए हैं। उम्मीद थी कि अच्छे नंबर मिलेंगे। ऑफलाइन पढ़ाई में कांसेप्ट क्लियर हो जाता है। ऑनलाइन में यह मुश्किल हो जाता है। आईआईटी की तैयारी कर रहा हूं। इंजीनियरिंग सर्विसेज में जाना चाहता हूं।
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