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मूंग, उर्द, मक्का की बुआई का सही समय

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तालग्राम। आलू की खुदाई के बाद खाली हुए खेतों में मूंग, उर्द और मक्का की बुआई का सही समय है। जायद में बोई जाने वाली मक्का के रकबे में इस बार करीब दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बढ़ोतरी की उम्मीद है। बीते वर्ष करीब 16521 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जायद में मक्का की बुआई हुई थी। पीएम मोदी के खेती को प्रोत्साहन देने के बाद इस बार जायद फसलों की बुआई बढ़ने के साथ ही किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
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कृषि प्राविधिक सहायक विनय शर्मा का कहना है कि बुआई से पहले बीज को कार्बनडाजिम ढाई ग्राम या थीरम तीन ग्राम प्रति किलो की दर से इस्तेमाल कर शोधित कर लेना चाहिए। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इस समय किसान मक्का की बुआई में तेजी से जुटे हैं। पीएम ने हाल ही में किसानों के लेकर कई प्रकार की राहत देने की बात कही है, इससे किसानों के चेहरे पर फिर रंगत दौड़ी है। इसका नतीजा है कि मक्का की फसल का रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
तालग्राम क्षेत्र के किसान बादाम सिंह, नरेंद्र सिंह, रामकुमार, श्रीकृष्ण का कहना है कि आलू फसल के बाद खाली हुए खेतों में फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च माह तक उर्द, मूंग की बुआई का सही समय रहता है। वातावरण में अनुकूल नमी रहती है, मूंग, उर्द की फसल को अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार निराई के बाद दो से तीन पानी में फसल तैयार हो जाती है। किसानों को अच्छा लाभ मिल जाता है।
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किसान मूंग, उर्द, मूंगफली और सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों का सहारा लें। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के प्रभारी डॉ. वीके कनौजिया ने कही। कहा कि यदि किसान बुआई से पहले और बाद में समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों से फसल के बारे में जानकारी लेते रहें तो फसल न सिर्फ ज्यादा होगी बल्कि ज्यादा आमदनी भी की जा सकेगी।
आजाद-2, शेखर -2, माश 479, नरेंद्र उर्द-1, आजाद-1, सुजाता, आईपीयू 2- 43 उर्द, मूंग की अच्छी किस्में हैं। यह अधिक उत्पादन देती हैं। यह मोजैक अवरोधी भी हैं।
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