इंदरगढ़(कन्नौज)। गरीबी और बेरोजगारी ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बड़ी बेटी मुस्कान ने खांसते हुए दम तोड़ दिया। वह पिछले चार माह से तपेदिक की बीमारी से परेशान थी। सही उपचार व खानपान न मिलने से शुक्रवार सुबह 10 बजे उसकी मौत हो गई। किसी तरह से परिजनों ने चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार किया।
वाकया इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के शाहनगर गांव का है। यहां के प्रमोद प्रजापति की चार संतानें थीं। सबसे बड़ी मुस्कान( 13) गांव के स्कूल में कक्षा आठ की छात्रा थी। दूसरी पुत्री मोहिनी आठ साल, पुत्र विपिन पांच व सृष्टि तीन साल की है। परिवार की गुजर बसर के लिए एक बीघा खेती है। रबी की फसल के दौरान गेहूं की बुआई की थी। यह अन्ना जानवर चर गए।
प्रमोद कोरोना काल से पहले दिल्ली में मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर करते थे। कोरोना काल में नौकरी छूट जाने से एक साल से गांव में हैं। खेती के अलावा आय का अन्य कोई साधन न होने से परिवार तंगी से गुजर रहा था। इसी दौरान मुस्कान टीबी की बीमारी से ग्रसित हो गई। प्रमोद ने पड़ोसियों से उधार लेकर औरैया जिले के बेला कस्बे में निजी चिकित्सक से उपचार कराया। बाद में आर्थिक दिक्कतों के चलते बेला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दवाइयां लाता रहा। पोषण वाला भोजन न दे पाने से मुस्कान की हालत लगातार बिगड़ती रही। गुरुवार को मुस्कान ने दम तोड़ दिया।
बच्ची तक नहीं पहुंची प्रशासन की नजर
कन्नौज। जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने टीबी रोग से पीड़ित पांच बच्चों को गोद लिया है। वह उन्हें पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराकर अच्छी पहल कर रहे है। इस बच्ची तक प्रशासन की नजर नहीं पहुंच सकी। किसी अफसर की नजर पड़ गई होती तो शायद जिंदगी को उत्साह से जी रही होती।