किले के ऊपरी भाग में किया गया खनन।
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कन्नौज। राजा जयचंद का किला ‘फतह’ करने के बाद युद्ध के मैदान में सूरमाओं को कंपकंपाने वाले आल्हा-उदल के किले पर खनन माफिया ‘चढ़ाई’ कर रहे हैं। माफिया किले की नींव खोदकर मलबा और मिट्टी बेच रहे हैं। आसपास के किसानों ने किले की जमीन को खेतों में मिला लिया है। इस पर फसल की जा रही है। अफसरों को इस ओर देखने की फुर्सत नहीं है। वहीं पुरातत्व विभाग इसे संरक्षित करने के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है।
शहर में पुलिस लाइन से करीब तीन किलोमीटर दूर चौधरियापुर होते हुए रिजगिर गांव में गंगा और काली नदी के तट पर आल्हा-ऊदल का किला है। यह करीब पांच से छह एकड़ में टीलों की शक्ल में फैला है। कंक्रीट की दीवारों और मलबे पर जंगली पेड़ उग आए हैं। यहां कई सालों से खनन माफिया मिट्टी उठा रहे हैं। नींव खोदकर मलबा बेचा जा रहा है। ऐसे में आसपास के किसानों ने भी मौके का फायदा उठाया। यह किले की जमीन को खेत में मिलाकर खेतीबाड़ी करने लगे हैं। कभी करीब 200 एकड़ में फैला यह किला आज पांच से छह एकड़ में सिकुड़ गया है। लोगों का मानना है कि अगर जल्द किले को बचाने के प्रयास न शुरू हुए तो आने वाले दिनों में अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। वहीं पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे के अवर संरक्षण सहायक दीपक कुमार ने बताया कि आल्हा-ऊदल का किला संरक्षित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इस तरह महोबा से आए थे आल्हा-ऊदल
राजा जयचंद के भतीजे लाखन की महोबा के चंदेल घराने में पैदा हुए आल्हा और उनके भाई ऊदल से गहरी मित्रता थी। आल्हा खंड काव्य के अनुसार महोबा के राजा परिमाल ने दोनों भाइयों को राज्य से निकाल दिया था। इन योद्धाओं ने कन्नौज आकर लाखन की शरण ली। लाखन के कहने पर राजा जयचंद ने गंगा और काली नदी के संगम के पास रिजगिर किले में दोनों भाइयों को ठहराया था। राजा जयचंद ने आल्हा को सेनापति बनाया था। इसके बाद राजा जयचंद ने आल्हा, ऊदल और अपने भतीजे लाखन के साथ उत्तर भारत से लेकर काबुल तक करीब 52 किले फतह किए थे।
कई बार खनन माफिया पर हुई कार्रवाई
वर्ष 2017 में तत्कालीन एसडीएम अरुण कुमार सिंह ने ऐतिहासिक धरोहरों पर खनन व कब्जा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया था। इस दौरान आल्हा-ऊदल के किले पर खनन कर रहे 18 माफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे खनन बंद हो गया था। अब फिर शुरू हो गया। एसडीएम गौरव शुक्ला ने बताया कि किले का निरीक्षण किया जाएगा। ऐतिहासिक धरोहरों पर खनन करने या नुकसान पहुंचाने वालों खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।