झांसी। वाणिज्य कर सचल दल अफसर शहर के आधा दर्जन से अधिक ट्रांसपोर्टरों पर मेहरबान हैं। इन ट्रांसपोर्ट पर कानपुर, इंदौर व दिल्ली से भारी मात्रा में किराना, रेडीमेड व अन्य टैक्स चोरी का माल लाया जाता है। मगर साठगांठ के चलते सचल दल इन ट्रांसपोर्ट पर आने वाली बड़ी गाड़ियों की जांच की जहमत नहीं उठाते हैं।
वाणिज्य कर कार्यालय में पांच सचल दल हैं। इनमें प्रत्येक सचल दल में एक सहायक कमिश्नर व दो वाणिज्य कर अधिकारी तैनात हैं। पिछले लंबे समय से सचल दल के अधिकारी महानगर आने वाली टैक्स चोरी का बड़ी गाड़ी का माल नहीं पकड़ सके हैं। दरअसल, महानगर के मिनर्वा व लक्ष्मी तालाब के पास कुछ ट्रांसपोर्ट ऐसी हैं, जो टैक्स चोरी का माल लाने का काम करती हैं। यह ट्रांसपोर्टर पहले दिल्ली से माल लाकर ग्वालियर में एकत्रित करते हैं, फिर मौका पाते ही उसको झांसी ले आते हैं। इसी तरह इंदौर और कानपुर से करोड़ों रुपये का टैक्स चोरी का माल लाया जाता है। इन ट्रांसपोर्ट से माल को झांसी महानगर व जिले के दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है। अफसर भी इस बात को भलीभांति जानते हैं, लेकिन वह उनके वाहनों की जांच करने का कभी प्रयास नहीं करते। इससे अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। ऑटो व लोडिंग से आ रहे माल को तो पकड़ा जा रहा है, लेकिन ट्रकों से आ रहे माल की अनदेखी की जा रही है। यही नहीं, सचल दल दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों को चेक करने में ज्यादा रुचि लेते हैं।
एक साल मिलता है सचल दल में रहने का मौका
वाणिज्य कर विभाग सचल दल में तैनात अफसरों का हर साल बदलता है। इस कारण सचल दल अधिकारी भी टैक्स चोरी रोकने में अधिक पसीना नहीं बहाना चाहते हैं।
ऐसे लगता है जुर्माना
अगर किसी व्यापारी का बिना बिल का माल पकड़ा जाता है तो 100 रुपये के माल पर 100 रुपये ही जुर्माना लगेगा। साथ ही संबंधित वस्तु पर जितने प्रतिशत टैक्स लगता है वह भी साथ में जुड़ेगा। अगर व्यापारी पंजीकृत है और उसका टैक्स चोरी का माल पकड़ा जाता है तो ऐसे मामले में जितना टैक्स बनेगा उतना ही जुर्माना जमा करना होगा।
कोरोना की परिस्थितियों के कारण चेकिंग का काम खुलकर नहीं हो पा रहा है। कोई सूचना मिलने पर ही चेकिंग की जाती है। वैसे हर माह पांच गोदामों की जांच करने के आदेश हैं। यह कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।
अशोक कुमार पांडे, प्रभारी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।