जिले की चार विधानसभाओं में से सपा ने बबीना व मऊरानीपुर में एक - एक बार जीत दर्ज की है, जबकि झांसी में अब तक खाता भी नहीं खुला है। लेकिन, गरौठा विधानसभा में पार्टी तीन बार जीत दर्ज कर चुकी है। हालांकि, यहां हुए विधानसभा के पंद्रह चुनावों में कांग्रेस के खाते में नौ जीत हैं। इसके अलावा भाजपा, बसपा व भारतीय जनसंघ को भी एक - एक बार मौका मिला है।
जिले की गरौठा विधानसभा ‘जालौन - भोगनीपुर - गरौठा संसदीय क्षेत्र’ के हिस्से में आती है। जालौन जिले की सीमा के इर्दगिर्द फैले इस क्षेत्र की जनता ने तीन बार साइकिल को विधानसभा पहुंचाया है। पिछले दो चुनाव यहां सपा के नाम रहे हैं। सपा इस बार जीत की हेट्रिक की उम्मीद के साथ मैदान में है। बसपा ने यहां से एक चुनाव 2002 में जीता था, पिछले चुनाव में हाथी मुख्य मुकाबले मेें रहा था। इस बार पार्टी की पिछले चुनाव की हार को जीत में बदलने की तैयारी है। कांग्रेस का इस सीट पर खासा दबदबा रहा है।
कांग्रेस ने यहां से नौ बार जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले चुनाव में पार्टी मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाई थी। इस सीट पर कांग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार वापस लाने के मंसूबे के साथ मैदान में है। भारतीय जनता पार्टी ने गरौठा से केवल एक बार ही जीत दर्ज की है और पिछले पांच चुनावों में पार्टी मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाई।
लेकिन, इस बार भाजपा लोकसभा चुनावों में इस सीट पर मिले परिणामों से खासी उत्साहित है और बदलाव की उम्मीद के साथ क्षेत्र में अपना परचम फहराने की तैयारी में जुटी हुई है।
इस चुनाव में गरौठा से सपा ने निवर्तमान विधायक दीपनारायण सिंह यादव पर दांव लगाया है, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने डा. अरुण मिश्रा को मैदान में उतारा है। भाजपा और कांग्रेस ने अभी प्रत्याशी तय नहीं किए हैं।
अब तक का रिकार्ड
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2012- दीपनारायण सिंह यादव (सपा), 2007- दीपनारायण सिंह यादव (सपा), 2002- बृजेंद्र कुमार व्यास (बसपा), 1996- चंद्रपाल सिंह यादव (सपा), 1993- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1991- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1989- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1985- कुंवर मानवेंद्र सिंह (भाजपा), 1980- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1977- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1974- रणजीत सिंह जूदेव (कांग्रेस), 1969- आत्माराम गोविंद खैर (कांग्रेस), 1967- के लाल (भारतीय जनसंघ), 1962- काशी प्रसाद द्विवेदी (कांग्रेस) तथा 1957- लक्ष्मण राव कदम (कांग्रेस)
कृषि है आधार और पानी कम
गरौठा विधानसभा क्षेत्र की आबादी 5,03,250 है। इसमें 3,38,140 मतदाता हैं। क्षेत्र में उद्योग - धंधों का भारी अभाव है। क्षेत्र की आबादी कृषि पर ही आधारित है। विधानसभा क्षेत्र के कस्बे समथर, मोंठ, पूंछ, गुरसरांय, बामौर, गरौठा में व्यापार के नाम पर छोटी - बड़ी दुकानें भर ही हैं। पानी यहां की बड़ी समस्या है। क्षेत्र के ज्यादातर हिस्से में भूगर्भ जल स्तर की दशा खराब है और नहरों का पानी खेतों की पूरी प्यास नहीं बुझा पाता है।
दावे
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हमारे पास सर्वजन का समर्थन
गरौठा में बसपा का मजबूत वोट बैंक तो है ही, साथ हमें सर्वजन का समर्थन भी है। कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट है। अब सभी यह समझ चुके हैं कि शांति और सुरक्षा बहनजी की सरकार में ही मिल सकती है। इसके अलावा सपा ने केवल वादे किए, विकास नहीं किया। जबकि, बसपा वादों में नहीं काम में विश्वास रखती है।
- तिलक चंद्र अहिरवार, पूर्व एमएलसी बसपा
जनता को कांग्रेस से हैं उम्मीदें
गरौठा में कांग्रेस का मजबूत जनाधार रहा है, जो इस बार विधानसभा चुनाव में वोट के रूप में नजर आएगा। क्योंकि, क्षेत्र की जनता के साथ सभी पार्टियां छल कर चुकी हैं। काम केवल कांग्रेस ने ही किया है। चाहे वो किसानों की कर्ज माफी हो या सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना। जनता की उम्मीदें कांग्रेस पर ही टिकी हुई हैं।
- चंद्रशेखर तिवारी, जिलाध्यक्ष - कांग्रेस
विकास की होगी जीत
इस चुनाव में गरौठा में विकास की जीत होगी। प्रदेश सरकार ने यहां विकास के अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इसकी बानगी एरच बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना व पूंछ - मऊरानीपुर की सड़क निर्माण में देखने को मिलती है। क्षेत्र के विकास के लिए जनता सपा के साथ है।
- राहुल सक्सेना, जिला उपाध्यक्ष - सपा
नहीं सुलझीं समस्याएं
गरौठा विधानसभा क्षेत्र में पानी - बिजली की समस्या विकराल है। खेतों को पानी नहीं मिल रहा है और बिजली आती नहीं। गुरसरांय कस्बा हो या गरौठा, सभी जगह सड़कों पर बड़े - बड़े गड्ढे हैं। विकास के नाम पर सिर्फ वादे हुए, काम नहीं हुआ। अब जनता को भाजपा से ही विकास की आस है।
- संजय दुबे, जिलाध्यक्ष - भाजपा