झांसी। डीजल लोको शेड में शुक्रवार को कंप्रेशर मशीन पर काम कर रही महिला टेक्नीशियन सुशीला (55) की मौत को लेकर उत्तर मध्य रेलवे इंप्लाइज संगठन के नेताओं ने उसका शव मशीन के पास रखकर जमकर हंगामा किया। नेताओं का आरोप था कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मृतका को भुगतना पड़ा। इस दौरान साढ़े तीन घंटे तक काम प्रभावित रहा। शाम पांच बजे मंडलीय अधिकारियों के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद पुलिस शव ले जा सकी।
शहर के खातीबाबा क्षेत्र की निवासिनी सुशीला (55) डीजल लोको शेड में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थी। वह कंप्रेशर अनुभाग में मशीन पर काम करती थीं।
दोपहर में मशीन स्टार्ट करते समय अचानक कंप्रेशर में उसकी साड़ी फंस गई और मशीन में फंसकर वह भी बुरी तरह घायल हो गईं। अचानक मशीन की तरफ अन्य कर्मचारियों का ध्यान गया तो उन्होंने अधिकारियों को अवगत कराते हुए मशीन बंद कराई। इस बीच सहकर्मियों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन एंबुलेंस काफी देर से पहुंची और जख्मी महिला को लेकर अस्पताल गई जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस बीच कर्मचारी काम बंद कर गेट पर खड़े रहे। करीब सवा तीन बजे अस्पताल से लौटी एंबुलेंस के अंदर आते ही शव उतारकर एनसीआरईएस के नेताओं ने उसे उसी मशीन के सामने रख दिया और अधिकारियों के बुलाने की बात करने लगे। इस दौरान उन्होंने उसके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। साढ़े तीन घंटे तक शव रखकर हंगामा किया। मौके पर मौजूद आरपीएफ ने उन्हें काफी समझाया बुझाया लेकिन अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इस संबंध में जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वरिष्ठ मंडलीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
साड़ी नहीं पहनी होती तो बच सकती थी जान
डीजल लोको शेड में कार्य करने वाली महिलाओं ने बताया कि सुशीला काम पर हमेशा सूट ही पहनकर आती थीं लेकिन शुक्रवार को वह साड़ी पहनकर आई थीं। अगर सूट पहनी होती तो शायद उसकी जान बच जाती। बताया कि सुरक्षा की दृष्टिकोण से महिलाएं सूट ही पहनकर आती हैं।