झांसी। एक बाइक पर तीन सवारी। यह दृश्य किसी एक सड़क या इलाके का नहीं बल्कि अब तो आम बात सी हो गई है। न कोई रोक रहा है न कोई टोक रहा है। अगर पिछले एक साल में हुए हादसों को देखें तो 43 युवाओं की जान चली गई जबकि 100 से ज्यादा चोटिल हो गए हैं। खास बात यह है कि इनमें से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना हुआ था। अधिकांश की मौत की वजह भी सिर में गंभीर चोट ही रही। इनमें कई घायल तो ऐसे भी हैं जो कई साल के बाद भी चल फिर नहीं पा रहे हैं।
केस एक- सीपरी बाजार के कांशीराम आवासीय कॉलोनी निवासी बेनी सिंह का पुत्र बॉबी अहिरवार (20) अपने बड़े भाई संजय (22), जीजा लोकेंद्र (28), एवं शिशुपाल (26) के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर चिरगांव से झांसी लौट रहा था। इसी दौरान दिगारा तिराहा के पास तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे टैंपो से जा भिड़ी। बॉबी की मौत हो गई जबकि तीन अन्य अभी तक घायल हैं। उनका मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
केस दो- रक्सा निवासी सुरेश अहिरवार का पुत्र सचिन (19 ) अपने दोस्त जितेंद्र (25) एवं सतीश (30) के साथ मऊरानीपुर से एक ही बाइक में लौट रहा था। नैगुआ पुल के पास मोटर साइकिल अनियंत्रित होकर सामने से आ रही दूसरी मोटर साइकिल से टकरा गई। मोटर साइकिल चालक सचिन की मौके पर ही मौत हो गई।
केस तीन- सीपरी बाजार निवासी बृजेंद्र वर्मा (23) अपने दोस्त ऋषभ (24) एवं सुरेंद्र (26) के साथ शादी समारोह में एक बाइक पर सवार होकर निकले। मेडिकल तिराहे के पास बाइक की रफ्तार नियंत्रित न होने से ट्रक के सामने आ गई। ट्रक की टक्कर की वजह से बृजेंद्र की मौके पर मौत हो गई।
केस चार- झांसी-ललितपुर राजमार्ग पर चार पहिया वाहन की टक्कर से चिरगांव निवासी नरेंद्र कुमार (32) की मौत हो गई जबकि उसका भाई हेमंत (24) एवं हरदेव (30) गंभीर रुप से घायल हो गया। तीनों ही एक बाइक पर सवार होकर जा रहे थे।
डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि एक बाइक पर जहां दो से ज्यादा लोग दिखाई देते हैं उन्हें पुलिस द्वारा न केवल टोका जाता है बल्कि चालान भी किया जाता है। पुलिस लगातार स्कूल कालेजों में जाकर जागरूक भी करती है। इसके लिए लोगों को खुद भी सोचना चाहिए।