झांसी। खुद को केंद्रीय मंत्री का पीए बताने वाले और नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने के आरोपी को राहत नहीं मिली पाई। अपर सत्र न्यायाधीश इंदु द्विवेदी की अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। ऐसे में अब उसे जेल में ही रहना होगा।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह गौर ने बताया कि खातीबाबा निवासी अंकित खरे ने थाना प्रेमनगर में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें उसने बताया था कि मथुरा जनपद के नौसेरपुर निवासी भूपेंद्र कुमार चौधरी को उसने एक रिश्तेदार की सरकारी नौकरी लगवाने के एवज में तीन लाख रुपये दिए थे। भूपेंद्र कुमार चौधरी ने खुद को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का रिश्तेदार बताया था। इसके अलावा अन्य बेरोजगारों से भी भूपेंद्र ने लाखों रुपये लिए थे।
20 जून 2019 को भूपेंद्र ने सभी को एटा बुलाया था। यहां एक होटल में एफसीआई के नियुक्ति पत्र थमा दिए थे। एफसीआई पहुंचने पर पता चला की नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर भूपेंद्र कुमार चौधरी को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से कई विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद हुए थे। तब से वो जेल में ही है। जमानत के लिए आरोपी की ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने खारिज कर दिया।