झांसी। नगर निगम सीमा बढ़ने के बीस साल बाद भी उन इलाकों के करीब तीस हजार भवन हाउसटैक्स दायरे के बाहर हैं। इनमें कई पॉश इलाके भी शामिल हैं। यहां नगर निगम ने सुविधाएं बढ़ा दीं लेकिन, इनको हाउसटैक्स दायरे में लाने की कवायद नहीं कर सका। इससे हर साल निगम खजाने को करीब पचास लाख से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा। वहीं, घर का मूल्यांकन न होने से आम लोग भी परेशान हैं।
नगर निगम की सीमा 7 फरवरी 2002 को बढ़ाई गई। उस दौरान 15 नई ग्राम सभा- बिजौली (246 हेक्टेयर), हंसारी गिर्द (25 हे.), गढ़ियागांव (177 हे.), करारी 168 (हे.), करगुवां (4.52 हे.), कोछाभांवर (36 हे.), भगवंतपुरा (74.47 हे.), पिछोर (25.87 हे.), सिमरधा (56 हे., सिमराहा (12 हे.), लहरगिर्द (122 हे.), बूढ़ा (86.90 हे.), भट्टागांव (11.47 हे.), सिगर्रा (32 हे.), मैरी (30 हे.) का कुल करीब 111.542 हे. जमीन निगम सीमा में शामिल हो गई। नगर निगम ने बूढ़ा, मैरी, भगवंतपुरा, पिछोर, कोछा भांवर समेत कई इलाकों में सड़कें चौड़ीकरण के अलावा स्ट्रीट लाइट समेत अन्य सुविधाएं पहुंचा दीं। इसकी बदौलत यहां आवासीय एवं व्यावसायिक निर्माण तेज हो गए लेकिन, पूरा दायरा अभी हाउसटैक्स दायरे में नहीं आ सका।
भट्टा गांव से पहले तक भवनों पर हाउसटैक्स लगा है लेकिन, अंदर के इलाके अभी भी अछूते हैं। कोछा भांवर से पहले मेडिकल तिराहा के आसपास के भवनों से हाउसटैक्स वसूली होती है लेकिन, आगे के इलाकों के सैकड़ों भवन इससे बाहर हैं। निगम के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 1.20 लाख घरों से ही टैक्स वसूली होती है जबकि भवनों की संख्या 1.50 लाख पाई गई। वहीं, नगर आयुक्त अवनीश राय का कहना है कि छूटे हुए इलाकों को भी हाउसटैक्स दायरे में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी कॉलोनियां भी हाउसटैक्स दायरे से बाहर
कई बड़ी कॉलोनियां तक हाउसटैक्स दायरे से बाहर हैं जबकि यहां के लोग अपने घरों का मूल्यांकन कराने को निगम में भटकते रहते हैं। पीतांबरा कॉलोनी, रॉयल सिटी, सांरध्रा नगर, अजय एनक्लेव जैसी दर्जनों कॉलोनियां हैं जहां से नगर निगम को सलाना लाखों रुपये का फायदा हो सकता है लेकिन, निगम प्रशासन ने इनको टैक्स दायरे में लाने की कवायद ही नहीं शुरू की।