झांसी। एक साल बाद भी बिकरु कांड में शहीद हुए झांसी के सिपाही सुल्तान सिंह की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। जबकि, इसके लिए वो पुलिस के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुकी है। बावजूद, बात नहीं बन पाई है। जबकि, घटना के तुरंत बाद सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए थे, लेकिन ये अभी तक हकीकत का चोला नहीं पहन पाए हैं।
दो जुलाई 2020 की काली रात को कानपुर के बिकरु में गई पुलिस टीम पर गैंगेस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला बोल दिया था। बदमाशों की ओर से पुलिस टीम पर गोलियों की बौछार कर दी गई थी। इसमें सीओ, एसओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इनमें झांसी के भोजला के रहने वाले सिपाही सुल्तान सिंह भी शामिल थे। घटना के बाद सरकार की ओर से वीरगति को प्राप्त हुए सिपाही के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा पत्नी उर्मिला को नौकरी देने की घोषणा की गई थी, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है। शहीद की पत्नी चूंकि टीईटी पास थी, ऐसे में उसके द्वारा शिक्षा विभाग में नौकरी मांगी गई थी, जिसे ठुकरा दिया गया था और पुलिस महकमे में ही शामिल करने का भरोसा दिया गया था। लेकिन, घटना के एक साल बाद भी शहीद की पत्नी को नौकरी का इंतजार है। जबकि, बिकरु कांड में शहीद हुए सीओ की बेटी वैष्णवी मिश्रा और एक सिपाही के भाई को बीते पुलिस विभाग में ज्वाइनिंग करा दी गई है।
नई भर्ती की तरह होंगे सभी टेस्ट
झांसी। शहीद सिपाही सुल्तान सिंह की पत्नी उर्मिला ने बताया कि शिक्षा विभाग में नौकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिए जाने के बाद पुलिस में सब इंस्पेक्टर के लिए उसने आवेदन किया था। विभाग की ओर से कहा गया है कि दौड़ और फिजिकल टेस्ट में पास होने के बाद लिखित परीक्षा पास करनी होगी, तब कहीं जाकर नौकरी लग पाएगी। उर्मिला ने बताया कि उसकी उम्र लगभग 33 साल है। सात साल की एक बच्ची भी है। ऐेसे में दौड़ और फिजिकल एग्जाम निकालना उसके लिए आसान नहीं है। जबकि, स्वास्थ्य भी अक्सर खराब बना रहता है। विभाग द्वारा उसकी नई भर्ती की तरह परीक्षा लेने की तैयारी है। उर्मिला ने बताया कि नौकरी के लिए वो पुलिस के उच्चाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री तक को प्रार्थना पत्र भेज चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
छह माह से नहीं मिल रही पेंशन
झांसी। शहीद सिपाही की पत्नी उर्मिला को नौकरी के साथ-साथ पेंशन के भी लाले पड़े हुए हैं। जनवरी के बाद से उसे पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है। पेंशन न मिलने का उर्मिला ठीक कारण भी नहीं बता पाई। उसने बताया कि घर का खर्च चलाने के लिए उसे बैंक में जमा रकम निकालनी पड़ रही है।
शहीद द्वार का निर्माण भी पूरा नहीं
झांसी। सिपाही सुल्तान सिंह की शहादत के बाद पूर्व सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव ने भोजला की मुख्य सड़क पर शहीद के नाम पर द्वार बनाने की घोषणा की थी। तत्काल उसका निर्माण भी शुरू कर दिया गया था। लेकिन, निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। द्वार अधूरा ही पड़ा हुआ है। हालांकि, भोजला गांव की ओर जाने वाली सड़क का नाम शहीद सुल्तान सिंह के नाम पर रख दिया गया है।