झांसी। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में भोजन में से एक अंश गाय, एक अंश कुत्ते और एक अंश कौवे को खिलाने से पितृ तृप्त होते हैं। ऐसा करने वालों से भगवान भी खुश होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं, लेकिन भगवान और पितृ हमारे चंद दिनों के सेवा भाव से तृप्त कैसे होंगे... जब वर्ष भर भूखी प्यासी गाय, कुत्ते और कौवे खाने की तलाश में यहां-वहां भटकते रहते हैं।
शहर में जिधर भी नजर जाती है वहां सड़कों पर अनगिनत गायें कूड़े-कचरे में भोजन की तलाश करती दिखती हैं। रोटी की तलाश में भौंकते भूखे कुत्तों को लोग डंडा लेकर भगाते या मारते फिरते हैं। भूखा कौवा जब छत या बालकनी में कांव-कांव करता है तो लोग अपशकुन मानकर उसे तुरंत भगाते हैं। पितृ पक्ष भले ही 15 दिन मनाए जाते हैं, पर हमारे पितरों का आशीष हम पर हमेशा बना रहे इसके लिए जरूरी है कि हम भूखी गायों को तुरंत भोजन कराएं। कुत्तों को खाना दें और कौवों व अन्य पक्षियों के साथ-साथ चीटियों को दाना डालें।
कई वर्षों से सड़क पर घूमने वाले बेसहारा कुत्तों को खाना-पानी और चिकित्सा उपलब्ध कराने वाली मिनी बताती हैं कि एक दिन उन्होंने एक कुत्ते को चोट और भूख से तड़पते देखा तो दिल पसीज गया। तब से अब तक उन्हें जहां भी भूखे प्यासे या जख्मी कुत्ते दिखाई देते हैं वह उनकी सेवा करती हैं। इसके लिए उन्होंने जीव आश्रय समिति भी बनाई है। इसमें कई लोग सहयोग करते हैं। समिति में गायों और कुत्तों को रोज भोजन खिलाया जाता है। समिति के लोग अपने आसपास के लोगों से अपील करते हैं कि बेजुबान पक्षियों और पशुओं को हर रोज खाना जरूर दें। गलियों और बाजारों में घूमने वाले कुत्तों और गायों को हर रोज खाना मिले तो वह कभी हिंसक नहीं होंगे। इससे पितृ और भगवान भी खुश होकर हमेशा हमें आशीष देंगे।
हम सभी गाय, कुत्ते और पक्षियों को हर रोज खाना देने की आदत डाल लें तो ये बेजुबान कभी भूखे नहीं रहेंगे।
पूनम मेहता
हमें सिर्फ पितृ पक्ष में ही नहीं हर रोज अपने आसपास के बेजुबान जानवरों और पक्षियों के खाने-पीने का इंतजाम करना होगा।
अमृता
इस नेक काम के लिए हम किसी दिवस का इंतजार न करें, आज से ही इसे अपनी आदत बना लें तो कोई पशु-पक्षी भूखा नहीं होगा।
राहुल द्विवेदी
सुबह उठकर पक्षियों को दाना और घर से निकलने पर गाय और कुत्ते को रोटी देना न भूलें, इससे पितृ और भगवान हमेशा आशीष देंगे।
अरविंद लाक्षाकार