झांसी - बबीना के बीच तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद अब ललितपुर - बिजरौठा के बीच दिसंबर तक नया ट्रैक खोलने की तैयारी रेल प्रशासन द्वारा की जा रही है। 30 किमी के इस सेक्शन में पटरी बिछाने का 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। इस सेक्शन में चार स्टेशन आते हैं।
झांसी से ललितपुर के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम रेलवे का निर्माण संगठन कर रहा है। इसमें झांसी से बबीना के बीच तीसरी लाइन (25.35 किलोमीटर) को बिछाने का काम पूरा हो चुका है। विगत 28 जुलाई को मुख्य संरक्षा आयुक्त मोहम्मद लतीफ खान ने निरीक्षण कर उक्त सेक्शन में गाड़ियां दौड़ाने की अनुमति भी प्रदान कर दी है। जल्द ही अब इस लाइन से मालगाड़ियां सीधे मालगोदाम की तरफ जा सकेंगी, उनको यार्ड में पटरियां नहीं बदलनी होंगी। इससे समय की बचत व संचालन बेहतर होगा।
वहीं, निर्माण संगठन अब ललितपुर - बिजरौठा के बीच दिसंबर तक नया ट्रैक खोलने की तैयारी कर रहा है। 30 किमी के इस सेक्शन में पटरी बिछाने का 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। कुछ जगह पटरी बिछाने व स्टेशनों पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का कार्य बाकी रह गया है। इस सेक्शन में ललितपुर, दैलवारा, जखौरा व बिजरौठा स्टेशन आएंगे। इन सभी स्टेशनों पर नई लाइन के लिए इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का भी कार्य होगा। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ललितपुर बिजरौठा के बीच तीसरी रेल लाइन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
अभी ये समस्याएं
- मथुरा-झांसी-बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी- बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है।
-आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं, क्योंकि आवागमन अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है।
- कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- इन मार्गों पर यातायात को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं।
- पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन बंद करना पड़ता है। इसके लिए लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है।
ये मिलेगी राहत
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- इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
- मालगाड़ियों के लिए बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी।
- नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा।
- मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा।
- दुर्घटना होने पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।