झांसी। पॉश इलाकों में स्थित नगर निगम की दुकानों की असली कीमत अब सामने आई। तिलक मार्केट की एक दुकान की नीलामी से निगम को साढ़े बीस लाख रुपये का प्रीमियम हासिल हुआ। इस दुकान सेे निगम को किराया भी 10 गुना बढ़कर मिलेगा।
नगर निगम के स्वामित्व में 1200 दुकानें हैं। महानगर के मुख्य स्थान इलाइट चौराहे से सटी तिलक मार्केट भी निगम के स्वामित्व में है। यहां कुल 55 दुकानें हैं। इनको बगैर किसी प्रीमियम के मामूली किराये पर आवंटित कर दिया गया था। उसके बाद मूल आवंटियों ने निगमकर्मियों की मदद से खुद काम न करके अपनी दुकानें किराये पर दूसरों को थमा दी। किरायेदारों (सिकमी) से आवंटी 15-20 हजार रुपये हर माह वसूल करके निगम को सिर्फ 250-300 रुपये का मामूली किराया अदा कर रहे हैं। सरकारी खजाने को लग रही चपत को देखते हुए यह दुकानें सिकमी के नाम करने की बात हुई लेकिन, निगम कर्मियों एवं आवंटियों की मिलीभगत से यह कवायद परवान नहीं चढ़ सकी।
तिलक मार्केट की दुकान संख्या- 18 महेंद्र कुमार को आवंटित थी लेकिन, 19 फरवरी 2018 से वह किराया नहीं जमा कर रहा था। आवंटी के सरकारी नौकरी में होने की शिकायत हुई। इन शिकायतों के चलते उसका आवंटन नगर आयुक्त ने निरस्त कर दिया। इसके बाद सिर्फ इसी एक दुकान के लिए नीलामी प्रक्रिया हुई। शुक्रवार दोपहर उपनगर आयुक्त कार्यालय में नीलामी हुई। इसमें छह लोगों ने हिस्सा लिया। रामजी लाल निवासी सदर बाजार ने 20.50 लाख रुपये की बोली लगाई। दुकान के लिए 3060 रुपये एवं 18 जीएसटी के मुताबिक किराया चुकाना होगा। साढ़े बीस लाख रुपये में एक दुकान आवंटित होने की चर्चा आज पूरे दिन नगर निगम में चलती रही। प्रभारी अधिकारी संपत्ति एनएन वाजपेयी के मुताबिक साढ़े बीस लाख रुपये में यह दुकान नए आवंटी को दी गई है।