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रंक से राजा बना देते हैं श्रीभूतनाथ मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग के दर्शन

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झांसी। श्रीश्री 1008 श्रीभूतनाथ मंदिर में दुर्लभ स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन किसी को भी रंक से राजा बना देते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस सिद्ध मंदिर में नारियल बांधने से मनवांछित फल प्राप्त होता है। इसी चाह में समूचे बुंदेलखंड के शिव भक्त इस मंदिर में भोलेनाथ की आराधना करने पहुंचते हैं। तंत्र-मंत्र और सिद्धि मनोरथ के लिए पूरे बुंदेलखंड में प्रसिद्ध इस प्राचीन मंदिर की सिद्ध गुफा भक्तों को इसके अद्भुत स्वरूप के दर्शन कराती है।
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डरू भोंडला मोहल्ले में गोपाल की बगिया के पास स्थित इस मंदिर को सिद्धि साधना के लिए तकरीबन 400 वर्ष पहले झांसी में रहने वाले मकड़ारिया परिवार के पूर्वजों ने स्थापित कराया था। इस स्थान पर तब चारों तरफ जंगल व पहाड़ियां थीं। मंदिर के सामने काफी बड़ा तालाब था जो अब लक्ष्मी तालाब के नाम से जाना जाता है। मंदिर के प्रबंधक और पुजारी शंकर लाल मकड़ारिया बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना तांत्रिक विधि-विधान से सिद्ध पुरुषों द्वारा कराई गई थी। दूसरे शिव मंदिरों की तरह यहां एक नंदी नहीं बल्कि दो नंदी एक साथ विराजित हैं।
शिवलिंग के ठीक सामने ऊपर की ओर पहाड़ी पर भगवान भैरव नाथ विराजे हैं। इनकी मूर्ति अति प्राचीन है। नंदी के पीछे माता शीतला की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। इनके अलावा पंचमुखी हनुमान जी और नौ ग्रह भी मंदिर में विराजित हैं। पहाड़ियों के किनारे बसे इस मंदिर में एक सिद्ध गुफा है, इसमें छोटे-छोटे शिवलिंग व मूर्तियां हैं। ऐसी मान्यता है कि इस गुफा में वर्षों से नाग-नागिन का एक जोड़ा रहता है, जिसे कई बार मंदिर की देखरेख करने वालों और कई भक्तों ने भी देखा है। साल भर नौकरी, शादी, बच्चे और सुख-शांति की कामना लिए हजारों भक्त मंदिर में दर्शन को आते हैं।
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प्रबंधक शंकर लाल ने बताया कि लोग अपनी मनोकामना लेकर यहां शिवजी के दर्शन करने आते हैं। शिवलिंग के ऊपर नारियल बांधते हैं। मनोकामना पूरी होने पर हजारों भक्त अपनी मनौती चढ़ाने आते हैं। लोगों की मान्यता है कि शिवलिंग के दर्शनों के बाद कई लोगों को रंक से राजा बनते देखा गया है। पूरे सावन माह में रोज एक अभिषेक मंदिर की तरफ से और दिन भर भक्तों की ओर से अभिषेक होते हैं।
महाशिवरात्रि पर सात प्रकांड पंडित रात भर करते हैं रुद्री का पाठ
झांसी। महाशिवरात्रि पर हर साल मंदिर में सुबह पांच बजे भोलेनाथ का सुंदर अभिषेक किया जाता है। इसके बाद शृंगार किया जाता है। महाशिवरात्रि पर मंदिर में सात प्रकांड पंडित रात भर रुद्री का पाठ करते हैं। इस पूजा में रात से लेकर सुबह तक चार बार विशेष आरती होती है। पहली आरती शाम को 7 बजे, दूसरी रात 10 बजे, तीसरी रात को 12 बजे और चौथी सुबह 5 बजे मंगला आरती की जाती है। विशेष पूजा में शामिल होने वाले सभी लोग रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं। दूसरे दिन मंदिर में विवाह की पंगत बैठायी जाती है। इसमें पंडितों और रात्रि जागरण करने वाले भक्तों के साथ अन्य भक्तों को प्रसाद के रूप में पंगत खिलाई जाती है।
महाशिवरात्रि पर सुबह 11 बजे निकलेगी भोलेनाथ की बरात
झांसी। अपनी प्राचीनता और सिद्धि के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर से शहर की सबसे पुरानी शिव बरात वर्ष 1960 से निकाली जा रही है। अबकी महाशिवरात्रि पर सुबह 11 बजे से शिव बरात निकाली जाएगी। इसमें हजारों भक्त हिस्सा लेंगे। भक्तों को प्रसाद के रूप में पौंनछक और भाग की बर्फी बांटी जाएगी।
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