झांसी। भारत सरकार ने धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े पिछली बार अगस्त 2015 में सार्वजनिक किए थे, जिसमें झांसी जनपद में सर्वाधिक संख्या हिंदुओं की सामने आई थी। जबकि, दूसरी बड़ी आबादी मुस्लिमों की थी। इसके छह साल बाद अब जाति आधारित जनगणना की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस पर कई विपक्षी दल भी एक राय नजर आ रहे हैं। हालांकि, अभी इस पर सरकार की ओर से फैसला लिया जाना बाकी है।
भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसर कमिश्नर की ओर से छह साल पहले धर्म आधारित जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। ये रिपोर्ट 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर दी गई थी, जिसके मुताबिक झांसी की कुल जनसंख्या 19.68 लाख में से सर्वाधिक संख्या हिंदुओं की 18,23,930 है। जबकि, मुस्लिमों की आबादी 1,47,842 है। तीसरे नंबर पर पर जैन धर्म की आबादी 7,328 है। चौथे स्थान पर क्रिश्चियनों की संख्या 7,050 है। पांचवें स्थान पर सिख धर्म की आबादी 4,951 और छठवें पर बौद्ध धर्म की आबादी 1,203 है। जबकि, अन्य धर्मों को मानने वालों की संख्या 6,299 है।
हालांकि, अब जाति आधारित जनगणना की चर्चाएं जोरों पर हैं। दरअसल, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों व सरकार केे घटक दलों का रुख भी मुखर है। कई दलों की ओर से लगातार जातीय जनगणना की मांग की जा रही है।
ये हैं धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े
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धर्म पुरुष महिला योग
हिंदू 9,66,273 8,57,657 18,23,930
मुस्लिम 76,999 70,843 1,47,842
जैन 3,798 3,530 7,328
क्रिश्चियन 3,499 3,551 7,050
सिख 2,970 1,981 4,951
बौद्ध 640 563 1,203
गांव में हिंदू और शहर में मुस्लिम ज्यादा
झांसी। धर्म आधारित जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में हिंदुओं की जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक व शहरी क्षेत्रों में कम है। इसके अलावा बौद्ध भी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा है। जबकि, अन्य सभी धर्मों के लोग शहर में अधिक और गांव में कम हैं। ग्रामीण क्षेत्र में हिंदुओं की संख्या 11,28,476 और शहरी क्षेत्र में 6,95,454 है। बौद्ध धर्म की जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में 834 व शहर में 369 है। वहीं, मुस्लिम शहर में अधिक और ग्रामीण क्षेत्रों में कम हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिमों की आबादी 30,445 व शहर में 1,17,397 है। क्रिश्चियन भी शहर में अधिक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिश्चियन धर्म के लोगों की जनसंख्या महज 858 तथा शहरी क्षेत्र में 6,192 है। जैन धर्म की शहरी आबादी 6,420 व ग्रामीण क्षेत्र में 908 है।
जितनी जिसकी भागीदारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी। जातिगत जनगणना से सभी जातियों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उसी के आधार पर सरकार पिछड़ी जातियों के विकास की नीति तैयार कर सकेेगी। जातिगत जनगणना के आंकड़े आने से वंचित वर्ग का विकास होगा।
- तनवीर आलम खान, महानगर अध्यक्ष - सपा
जातिगत जनगणना देश और सर्व समाज के लिए हितकारी होगी। कई जातियां ऐसी हैं, जिनकी संख्या देश की आजादी के दशकों बाद भी स्पष्ट नहीं है। इनमें से तमाम जातियां बेहद पिछड़ी हुई हैं। सही आंकड़े सामने आने से इन जातियों के विकास की सही योजना तैयार की जा सकेगी।
- राजू राजगढ़, जिलाध्यक्ष - बसपा
जातिगत जनगणना के मामले में सरकार को रोहिणी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही इस मसले पर सरकार कोई फैसला लेगी। वैसे सरकार की ओर से इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। कोरोना के चलते अब तक राष्ट्रीय जनगणना की प्र्रक्रिया भी थमी हुई है।
- किरण वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष - भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी जातिगत जनगणना की कोशिशों में जुटी हुई है। इसके जरिये सरकार देश में लोगों के बीच विभाजन का काम कर रही है। इससे आपसी वैमनस्यता बढ़ेगी। ये कोई प्रेमभाव बढ़ाने वाला विषय नहीं है। सरकार को देश को बांटने वाला कोई भी काम नहीं करना चाहिए।
- अरविंद वशिष्ठ, शहर अध्यक्ष - कांग्रेस