झांसी। रेल मंडल के छोटे स्टेशनों पर अब स्टेशन मास्टरों को 12 घंटे की नौकरी नहीं करनी होगी। रेल प्रशासन ने अब बाकी स्टेशनों की तरह यहां भी आठ घंटे का रोस्टर लागू कर दिया है। ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन लंबे समय से इस अमानवीय रोस्टर को खत्म करने की लड़ाई लड़ रहा था।
झांसी-मानिकपुर सिंगल ट्रैक पर 25 से अधिक छोटे-बड़े स्टेशन हैं। इस रूट पर गाड़ियों की संख्या कम होने के कारण रेल प्रशासन ने ओरछा, बरुआसागर, निवाड़ी, टेहरका, रानीपुर रोड, रोरा, बेलाताल, कुलपहाड़, कबरई व मटौंध स्टेशन पर स्टेशन मास्टरों की ड्यूटी का 12 घंटे का रोस्टर बना रखा है। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक और रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक रोस्टर चल रहा है। जबकि इस रूट के बाकी स्टेशनों पर आठ घंटे के रोस्टर का प्रावधान है।
मगर अब इस ट्रैक पर ओएचई लाइन डलने के बाद से ट्रेनों व मालगाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग होने के बाद से ट्रेनों की गति भी बढ़ गई है। रेल प्रशासन ने स्टेशन मास्टरों की समस्या को देखते हुए उक्त स्टेशनों पर भी आठ घंटे का रोस्टर लागू कर दिया है। इस संबंध में सहायक कार्मिक अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने आदेश जारी कर दिए हैं।