झांसी। कहते हैं कि कोई व्यक्ति नौकरी से रिटायर हो जाता है तो लोग मान लेते हैं कि उसकी जिंदगी में अब कुछ करने को नहीं रहा। आमतौर पर रिटायर्ड व्यक्ति भी निराशा और अकेलेपन में जीवन जीने का आदी हो जाता है, लेकिन बदलते समाज में ये बातें पुरानी हो गई हैं। आज शहर के लक्ष्मीबाई पार्क, वृंदावन लाल वर्मा पार्क, मैथिलीशरण गुप्त पार्क, पब्लिक पार्क और जीआईसी में ऐसे तमाम बुजुर्गों की मंडली जम रही है जो रिटायरमेंट को नौकरी का हिस्सा भर मान रहे हैं। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद सही मायने में जिंदगी की नई पारी शुरू होती है।
बुजुर्गों का कहना है कि इसी उम्र में अपने सारे शौक और ख्वाहिशें पूरी करने का मौका मिलता है। बुजुर्ग बताते हैं कि वह अपने दोस्तों और पार्क में वॉकिंग के दौरान मिलने वाले साथियों से चैटिंग करते हैं। मोबाइल पर हर रोज हाय-हैलो करते हैं, शाम को एक साथ मंडली जमती है। दुख-सुख सब शेयर करते हैं। अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने के लिए चार बजे सैर को निकल पड़ते हैं, और रिटायर होकर निराश बैठने वाले दूसरों लोगों को भी मोटीवेट भी करते हैं। हर रोज कुछ नया सीखने और नया करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि अपने दिल को कभी भी बूढ़ा मत बनाइये, जिंदगी बहुत खूबसूरत है, हमेशा खुलकर जिंदगी का मजा लीजिए।
अंतररार्ष्टीय वृद्ध दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्सन) हर वर्ष एक अक्तूबर को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम डिजिटल एक्विटी फॉर ऑल एजेज है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 दिसंबर 1990 को एक अक्टूबर को वृद्ध व्यक्तियों के रूप में नामित किया था।
दिल और दिमाग को रखते हैं दुरुस्त, लगाते हैं ठहाका
बीकानेर वाला से रिटायर्ड आरएसएस धनवंतरि शाखा के कार्यवाह 67 वर्ष के अशोक अग्रवाल समरया कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अपनी खुशियों को खत्म न होने दें। उन्होंने बताया कि ह पहले की तरह आज भी सुबह 4.30 बजे उठ जाते हैं। घर और देश की राजनीति से दूर अपने संगी-साथियों संग बातें करते हैं, ठहाके लगाते हैं। मोबाइल पर हर रोज सुबह एक-दूसरे को नमस्कार करते हैं और एक दूसरे की खोज खबर रखते हैं, ताकि किसी साथी को कोई समस्या हो तो सह मिलकर उसका सहयोग कर सकें। शाम को सभी जीआईसी पार्क में मिलते हैं।
रेलवे से रिटायर्ड 65 वर्ष के रामनरेश शर्मा कहते हैं कि वह आराम से सुबह 6 बजे उठकर अपना मनपसंद नाश्ता बनवाते हैं। कभी-कभार खुद भी कुकिंग कर लेते हैं। सुबह-शाम वॉक पर निकलना और पार्क में अपने साथियों के साथ बातें करना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। सेहत के लिए दिल और दिमाग को दुरुस्त रखते हैं।
यूपीपीसीआई से रिटायर्ड आरसी अग्रवाल बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अपनी दिनचर्या को दुरुस्त रखें। वह आज भी सुबह 4.30 बजे उठकर पांच किमी. की सैर करते हैं। शाम को पार्क में दोस्तों से मिलते हैं। एक्सरसाइज करते हैं। हर रोज कुछ नया सीखने के साथ अपना दिन शुरू करते हैं।
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रोज कुछ नया सीखें और परिवार के साथ उनकी खुशियां बांटें
एसबीआई लखनऊ से रिटायर्ड एसपी अग्रवाल और डीआईजी स्टांप रजिस्ट्रेशन से रिटायर्ड जयप्रकाश अग्रवाल कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अपनी वो इच्छाएं जरूर पूरी करने की कोशिश करें जो आप नौकरी के दौरान किसी कारणवश नहीं कर पाए। बच्चों से ही सही रोज कुछ नया सीखें और परिवार के साथ उनकी खुशियां बांटें। लोगों पर अपनी जरूरतें और इच्छाएं बिल्कुल न थोपें। अपना दुख और सुख दोनों दोस्तों के साथ शेयर करें और खुश रहें। 67 वर्ष के एडवोकेट एलआर अग्रवाल अपनी वकालत छोड़ चुके हैं, लेकिन सुबह 4 बजे उठकर छह-सात किलोमीटर की सैर करना कभी नहीं भूलते। दोस्तों के साथ शाम को घूमते हैं और परिवार के साथ अपनी हर खुशी शेयर करते हैं।
रेलवे से रिटायर हॉकी एसोसिएशन से जुड़े संजीव कुमार पहले की तरह आज भी सुबह 5 से 8 बजे तक का समय ग्राउंड में बिताते हैं। अपनी हॉकी की रुचि को उन्होंने कम नहीं होने दिया। अपनी दिनचर्या का पूरा ध्यान रखना और दिन भर फिट रहना उनकी आदत बन चुकी है।
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रिटायर होने के बाद एक नई लाइफ शुरू होती है। आपको फिर से अपने आप को बिजी और व्यवस्थित करना पड़ता है, इसमें परिवार और साथियों का साथ बहुत जरूरी है।
प्रेम सिंह
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लोग समझते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आदमी बेकार हो जाता है, लेकिन लाइफ व्यवस्थित रखें तो आप हमेशा एक्टिव बने रहेंगे और हर चीज में रुचि रखेंगे।
बाबू लाल
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काम करने वाला व्यक्ति कभी रिटायर ही नहीं होता। रिटायरमेंट सिर्फ आपकी ड्यूटी का एक अंग है। इससे आपकी जिंदगी निराशा से न भर जाए, इसका ध्यान जरूर रखें।
रामदास
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रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति को परिवार और समाज में खुद को बिजी रखना चाहिए, इससे कभी अकेलापन और निराशा महसूस नहीं होती है। व्यक्ति हमेशा ऊर्जावान बना रहता है।
एमपी सिंह
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व्यक्ति किसी भी नौकरी से रिटायर क्यों न हो, उसे कभी खुद को रिटायर नहीं मानना चाहिए। खुद को हमेशा तरोताजा रखने के लिए अपनी रुचियों को जगाएं और आगे बढ़ते रहें।
अमर सिंह सचान