झांसी। चार साल तक सपा से दूरी बनाए रहे विधान परिषद के पूर्व सदस्य श्यामसुंदर सिंह यादव को समाजवादी पार्टी ने बबीना विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। गुरुवार तक वह भाजपा में थे और शुक्रवार को सपा में शामिल होते ही उन्हें बतौर इनाम टिकट दे दिया गया। पार्टी नेतृत्व के इस फैसले से स्थानीय सपाई हतप्रभ हैं। उधर, बबीना विधानसभा क्षेत्र से दावेदार दीपमाला को सपा ने झांसी सदर से प्रत्याशी बनाया बनाया है। अचानक हुए इस उलटफेर से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
बबीना में सपा ने भले ही एक बार जीत दर्ज की हो, परंतु यहां पार्टी का वोट बैंक अच्छा माना जाता है। यही वजह है कि यहां टिकट को लेकर पार्टी में मारामारी की स्थिति मची हुई थी। बबीना से एक दर्जन सपा के दिग्गज टिकट की दौड़ में शामिल थे। इनमें बबीना से पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके राज्यसभा सदस्य डा. चंद्रपाल सिंह यादव के भतीजे भी थे। पार्टी नेताओं की ओर से सांसद के पुत्र का नाम भी उछाला जा रहा था। सभी दावेदार क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय भी थे। लेकिन, पार्टी ने शुक्रवार को अचानक फैसला लेते हुए भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए श्यामसुंदर सिंह को प्रत्याशी बना दिया। श्यामसुंदर ने शुक्रवार को सुबह ही पार्टी नेता शिवपाल सिंह यादव के समक्ष सपा में दुबारा वापसी की है। सपा के प्रदेशीय नेतृत्व द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले से केवल सपा ही नहीं, बल्कि भाजपा के स्थानीय नेता भी हतप्रभ रह गए। बीते रोज भाजपा के कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम में श्यामसुंदर समर्थकों के साथ मौजूद थे। उनके सपा में शामिल होने की भाजपाइयों को भनक तक नहीं लगी। खास बात यह कि श्याम सुंदर को प्रत्याशी बनाने से पहले पार्टी हाईकमान ने सपा की स्थानीय इकाई विचार-विमर्श तक नहीं किया।
श्यामसुंदर सिंह यादव सपा से दो बार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। याद दिला दें कि बबीना विधानसभा क्षेत्र से टिकट न मिलने पर वह 25 अगस्त 2011 को सपा छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। 2012 में बबीना में विधानसभा का चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा था, जिसमें वह तीसरे स्थान पर रहे थे।
वहीं, झांसी विधानसभा से दीपमाला कुशवाहा व बबीना विधानसभा से श्याम सुंदर यादव को सपा द्वारा प्रत्याशी बनाने पर उनके समर्थकों व पार्टी के सदस्यों ने इलाइट चौराहा पर आतिशबाजी की और मिष्ठान वितरित किया। इस अवसर पर स्वदेश यादव, आमिर खान, अतीक अहमद, शिवम लहार आदि मौजूद रहे।
झांसी। समाजवादी पार्टी ने झांसी सदर विधानसभा से दीपमाला कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी का यह फैसला भी स्थानीय सपाइयों के लिए चौंका देने वाला रहा। दीपमाला बबीना से टिकट मांग रहीं थीं, परंतु उन्हें प्रत्याशी झांसी से बना दिया गया।
झांसी विधानसभा सीट पर सपा को अब तक जीत का स्वाद चखने को नहीं मिला है। लेकिन सपा सरकार में नगर में हुए विकास कार्यों की वजह से इस बार पार्टी उत्साहित है। इस सीट से टिकट के लिए आठ दावेदारों ने पार्टी के प्रदेशीय नेतृत्व के समक्ष आवेदन किया था। लेकिन, सभी को निराशा का सामना करना पड़ा। बताते चलें कि दीपमाला कुशवाहा 2007 से समाजवादी पार्टी में सक्रिय हैं। उन्होंने 2009 में लोकसभा चुनाव बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लड़ा था। जब बसपा सत्ता में थी तब सपा की ओर से चलाए आंदोलन के दौरान दीपमाला चर्चा में आईं थीं। उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय पर कब्जा कर लिया था। इस मामले में वह जेल भी गईं थीं।
- जानिये श्यामसुंदर सिंह को
श्यामसुंदर सिंह यादव ग्राम पारीछा के रहने वाले हैं। वह लगातार दो बार समाजवादी पार्टी से झांसी-ललितपुर-जालौन स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। पहला चुनाव उन्होंने 1998 में व दूसरा 2004 में जीता था। 2011 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे और बबीना से विधानसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें 44,700 वोट हासिल हुए थे। श्यामसुंदर के भाई विशुन सिंह पहले ही भाजपा छोड़ सपा में शामिल हो चुुके हैं। विशुन सिंह दतिया से जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं।
- जानिये दीपमाला कुशवाहा को
दीपमाला कुशवाहा का जन्म इटावा में हुआ था, लेकिन उनकी परवरिश झांसी में ही हुई। उनके पिता स्व. त्रिभुवन कुशवाहा पारीछा पावर प्लांट में इंजीनियर थे। दीपमाला कुशवाहा ने 2011 में सपा से किनारा करते हुए बतौर निर्दलीय प्रत्याशी झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें पैंतीस हजार वोट हासिल हुए थे। वह हार गई थीं। इसके बाद फिर वह सपा में सक्रिय हो गईं थीं। वर्तमान में वह सपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हैं। पूर्व में भी अन्य पदों पर भी रह चुकी हैं।
स्थानीय नेताओं को नहीं लिया विश्वास में
पार्टी नेतृत्व ने झांसी व बबीना विधानसभा के प्रत्याशियों की घोषणा में स्थानीय नेताओं को विश्वास में नहीं लिया और न ही उनसे रायशुमारी की गई। मुझे तो टीवी न्यूज से जानकारी हुई। अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर अंगुली तो नहीं उठाई जा सकती।
सुदेश पटेल
(जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी)
भाजपा ने नहीं रखा निष्ठा का ख्याल
-चार साल भारतीय जनता पार्टी में पूरी निष्ठा के साथ काम किया, परंतु भाजपा ने इसका ख्याल नहीं रखा। भाई के सपा में होने से उन्हें हमेशा संदेह से देखा गया। भारतीय जनता पार्टी में जमीनी हकीकत नहीं देखी गई। इसलिए सपा में फिर आ गया।
श्यामसुंदर सिंह यादव
सभी की संतुष्टि संभव नहीं
पार्टी नेतृत्व ने मुझ पर भरोसा जताया है। उसकी उम्मीद पर मैं खरा उतरने की कोशिश करूंगी। अब सभी को संतुष्ट करना संभव नहीं है। घर में चार बर्तन हैं, तो आपस में खनकेंगे ही। मुझे यकीन है कि सभी स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मेरे साथ हैं।
दीपमाला कुशवाहा