झांसी। भादों शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर सोमवार से पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं। पुत्र और कुटुंब जन अपने पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए उन्हें तर्पण करेंगे। श्राद्ध कर्म कर ब्राह्मणों, गायों, कौओं, कुत्तों और चींटियों को भोजन कराएंगे। ऐसे में जिस कुल में कोई बेटा न हो, वहां बेटियां और बहनें भी अपने पितृ जनों का तर्पण कर सकती हैं। जिनके कुल में बच्चे नहीं हैं वहां महिलाएं भी तर्पण कर सकती हैं।
आचार्य हरिओम पाठक बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार पितृ का श्राद्ध और तर्पण करने का पहला अधिकार पुत्र का होता है। पुत्र नहीं हैं तो कुटुंब के भाई-भतीजे तर्पण कर सकते हैं, लेकिन एकल परिवार होने या आपसी मनमुटाव में ऐसा संभव न हो तो बेटियां और बहनें भी पितृ का श्राद्ध और तर्पण कर सकती हैं। वह भी तर्पण के बाद शुद्ध सात्विक भोजन बनाकर पंडित को खिलाएं, इससे पितृ खुश होकर आशीष देते हैं।
महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार पितृपक्ष का प्रारंभ 20 सितंबर से हो रहा है। पूर्णिमा श्राद्ध तिथि सोमवार को मनेगी। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान 16 दिन पूर्वज धरती पर आते हैं। परिवारजनों द्वारा तर्पण और पिंडदान करने पर जहां उन्हें संतुष्टि की प्राप्त होती है। वहीं, वह अपने वंशजों को खुशहाल जीवन का आशीष प्रदान करते हैं। पितृ पक्ष में लोग सुबह जलाशयों अथवा अपने घरों में पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें तर्पण करते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार पितरों को तिल से तर्पण दिया जाता है।
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विदेश में रह रहे बच्चे फूल और चावल से कर सकते हैं तर्पण
-आचार्यों के अनुसार जो लोग देश-विदेश में हैं और किसी वजह से विधि-विधान से अपने माता-पिता व पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण नहीं कर सकते हैं। वह विदेश में ही चावल, फूल और दूर्वा (घास) हाथ में लेकर अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनका तर्पण करें तो पूर्वज खुश होते हैं। उधर, अब लोग जीते जी अपने पिंडदान कराने लगे हैं। उन्हें लगता है कि मरने के बाद कोई उनका पिंडदान नहीं करेगा तो ऐसे कई लोग पहले ही पिंडदान करवाने के लिए बुकिंग कर देते हैं। इसके लिए कई वेबसाइट हैं।
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मोक्षदायिनी अमावस्या को करें अज्ञातों का पिंडदान
आचार्य हरिओम पाठक बताते हैं कि यदि परिवार में किसी की मृत्यु का दिन पता न हो या किसी की अज्ञात मौत हुई हो तो उस व्यक्ति का श्राद्ध कर्म अमावस्या को करना चाहिए। अगर किसी अज्ञात व्यक्ति की कोई पहचान नहीं हैं और कोई व्यक्ति या संस्था उसका पिंडदान व श्राद्ध कर्म करना चाहती है तो इसे भी अमावस्या को करना चाहिए। वहीं यदि कोई लापता है और परिवार के लोग यह मान लें कि उसकी मत्यु हो चुकी है तो ऐसे व्यक्ति का श्राद्ध भी अमावस्या को करना चाहिए। इस बार अमावस्या छह अक्तूबर को है। इसे मोक्षदायिनी अमावस्या व पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है। पिंडदान का यह विशेष दिन कहा गया है इसलिए सभी भूले-बिसरे और अज्ञातों के लिए दान और पिंडदान इसी दिन करने का विधान है।
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ऑनलाइन पंडित और पिंडदान के लिए कई एप और वेबसाइट
-बदलते समय में पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित सर्विस में आपको गया, पटना, दिल्ली, सीतामढ़ी, वाराणसी, मुंबई, नासिक, त्रियंबकेश्वर, उज्जैन, हैदराबाद, इंदौर, हरिद्वार और अन्य शहरों के ऑनलाइन पंडित मिलेंगे। इसके अलावा एप पर जानकारी देने से आपको आपके शहर में भी पंडित मिल जाएंगे। यदि लिस्ट में आपका शहर नहीं है तो भी आप किसी भी राज्य से सशुल्क पंडित बुलवा सकते हैं। इसके अलावा भी ऑनलाइन पिंडदान के लिए गया में बिहार टूरिज्म द्वारा ऑनलाइन पैकेज हैं। आप अपने पूर्वजों के पिंडदान की पूजा वीडियो भी देख सकते हैं। इंटरनेट पर कई कंपनियां पिंडदान ऑनलाइन करवा रही हैं। शुरूआत 2 हजार रुपये से है। पितरों की पूरी जानकारी ली जाती है। ऑनलाइन फीस देनी होती है। वेबसाइट पर बुकिंग की जाती है।
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28 को मनेगा महालक्ष्मी का पर्व
पितृपक्ष में कोई भी नया कार्य करने पर रोक है। कई लोग इस अवधि में खरीदारी करने से भी बचते हैं। हालांकि, महालक्ष्मी पर्व ही एक मात्र ऐसी तिथि है, जिसमें नया काम कर सकते है अथवा नई वस्तु खरीदी जा सकती है। पितृपक्ष में यह पर्व 28 सितंबर को मनाया जाएगा।