झांसी। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाने अब नगर निगम का पुनरीक्षित बजट सदन के सम्मुख पेश नहीं होगा। कार्यकारिणी से पारित बजट के मुताबिक ही चालू वित्तीय वर्ष के लिए पैसे खर्च किए जाएंगे।
उप्र नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा 146 के तहत वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत बजट को प्रत्येक छमाही में नगर निगम सदन से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। सदन के सामने कार्यकारिणी से पारित पुनरीक्षित बजट पेश किया जाता है। करीब तीन महीने विलंब से नगर निगम ने 22 दिसंबर को कार्यकारिणी के सम्मुख पुनरीक्षित बजट पेश किया था। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 435 करोड़ रुपये के बजट में 219.59 करोड़ रुपये आय एवं 244.09 करोड़ रुपये व्यय को कार्यकारिणी ने अपनी मंजूरी दी थी।
कार्यकारिणी के इस फैसले से अन्य पार्षद सहमत नहीं थे। भाजपा पार्षद भी इससे नाराज थे। उनका कहना है कि जब सभी वार्डों में कूड़ा उठान का काम स्मार्ट सिटी के जरिए हो रहा तब यह बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। कार्यकारिणी के फैसले के खिलाफ इन पार्षदों ने निगम अफसरों को सदन के भीतर घेरने का मन बनाया हुआ था लेकिन, उनके यह सारे अरमान धरे रह गए।
22 दिसंबर को कार्यकारिणी की बैठक के बाद अगले आठ-दस दिन में सदन की बैठक बुलाने की तैयारी थी लेकिन, कई विवादित मामलों के उठने की आशंका को देखते हुए यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब आठ जनवरी को आचार संहिता लगते ही बजट पेश किए जाने की रही-सही संभावना भी खत्म हो गई। आचार संहिता के चलते अब कार्यकारिणी से पारित पुनरीक्षित बजट के मुताबिक ही सभी कार्य करने होंगे। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है आचार संहिता लग जाने के बाद कोई भी विकल्प नहीं बचता। अब नए वित्तीय वर्ष का बजट ही पेश किया जा सकेगा।