झांसी। जिले मेें शिक्षकों के स्कूल न जाने को लेकर आए दिन शिकायतें आती रहती हैं। अधिकारी भी इन शिकायतों की न तो जांच करते हैं और न ही कोई कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों मंडल के स्कूलों के 223 शिक्षक गायब मिले, लेकिन अफसरों ने कार्रवाई नहीं की। शासन स्तर पर समीक्षा में पोल खुलने के बाद मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के निदेशक ने बीएसए से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद स्कूल खुलने और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर निदेशालय और प्रशासन सक्रिय हो गया था। ऐसे में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर गठित टास्क फ ोर्स ने कई परिषदीय स्कूलों के निरीक्षण किए। मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण निदेशक ने टास्क फ ोर्स को निर्धारित संख्या के अनुसार विद्यालयों के निरीक्षण के लिए निर्देशित किया गया था। प्रेरणा एप पर निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड भी कराई गई। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि अनुपस्थित शिक्षकों की सूची में झांसी में 43, ललितपुर में 78 और जालौन में 102 शामिल रहे, लेकिन जिला स्तर पर अनुपस्थित शिक्षकों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
इस पर मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण निदेशक ने आपत्ति दर्ज करते हुए बीएसए से एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। मामले में प्रभारी बीएसए संतोष वर्मा ने बताया कि परियोजना निदेशक के निर्देशों का पालन किया जायेगा।
जस की तस रहेगी रसोईया
परिषदीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली जिले की 4442 रसोईया जस की तस रहेगी। न इन्हें हटाया जायेगा और न ही नई नियुक्ति होगी। गौरतलब है कि स्कूलों में तैनात रसोइयों को 1500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। प्राधिकरण के जिला समन्वयक राज बहादुर सिंह ने बताया कि लॉकडाउन व ग्रीष्मावकाश की अवधि में मध्यान्ह भोजन योजना में कार्यरत रसोईयों को मानदेय दिया जा रहा है ।