झांसी। ‘जौन धरती पे हमाई रानी लक्ष्मीबाई जू ने आजादी के लाने अपनौ सबई न्यौछावर कर दऔ, वा धरती के वासियन कौ हमाओ हाथ जोड़के प्रणाम पहुंचे, झांसी ने तो आजादी की अलख जगाई हती, इतेई की माटी के कन-कन में वीरता और देशप्रेम बसौ है। झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जू कौ हमाओ कोटि कोटि नमन।’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत बुंदेली बोली से की। इस दौरान क्षेत्र से भावनात्मक रिश्ता जोड़ते हुए मोदी ने चंदेलों से लेकर बुंदेलों तक की वीरता को याद किया और क्षेत्र के सभी महापुरुषों का जिक्र किया।
वीरांगना की जयंती पर झांसी आए पीएम ने अपने संबोधन की शुरुआत बुंदेली भाषा में करते हुए रानी लक्ष्मीबाई को नमन किया। अपने भाषण के दौरान वीरांगना झलकारी बाई की वीरता और सैन्य कौशल को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके अलावा उन्होंने आल्हा-ऊदल, अवंती बाई लोधी को याद करते हुए चंदेलों और बुंदेलों की वीरता को नमन किया। इतना नहीं, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे कई अमर सेनानी, महान क्रांतिकारी युग नायक और नायिकाएं हैं, जिन्होंने मातृभूमि के लिए बलिदान दिया, वे उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने झांसी के लोगों से जुड़ते हुए कहा कि रानी की सेना में लड़ने वाले, बलिदान देने वाले आपके ही पूर्वज हैं। मैं उन सभी नमन करता हूं। इतना ही नहीं, वे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भी नहीं भूले, उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में ध्यानचंद के नाम पर खेल अवार्ड शुरू किया है। पीएम के इस उद्बोधन के दौरान वहां मौजूद लोगों ने उत्साह में कई बार भारत माता की जय के नारे लगाए।