झांसी। जीआरपी ने आखिर एक महीने बाद पटना इंदौर एक्सप्रेस व पुष्पक एक्सप्रेस लूटपाट मामले में तीन लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि एक बदमाश फरार है। जीआरपी की मानें तो बदमाशों ने अपने परिवार की एक शादी के खर्चों को पूरा करने के लिए वारदातों को अंजाम दिया था। इसके लिए बदमाश कई दिनों तक अपने मोबाइल बंद करके कानपुर ट्रैक के अलग-अलग स्टेशनों पर घूमते रहे। पूरी तैयारी के साथ सिग्नल फेल किए और ट्रेन रुकते ही खिड़की से हाथ डालकर महिला यात्रियों के गले से आभूषण लूट लिए। बदमाशों ने उरई के एक सुनार से आभूषण बेचने के लिए संपर्क किया था। इस बात का पता लगने पर बदमाशों को आभूषण बेचने से पहले ही पकड़ लिया गया।
बदमाशों ने 23 अगस्त की रात उरई सेक्शन के सरसौखी स्टेशन आउटर पर 09322 पटना इंदौर एक्सप्रेस में सवार इंदौर के तुकोगंज निवासी दीपांशी तिवारी, पटना के सिरौनी निवासी अंजनी व बाराबंकी के हैदरगढ़ निवासी अनीता के साथ लूटपाट की थी। हथियारों के बल पर बदमाश महिलाओं के गले से मंगलसूत्र छीन ले गए थे। इसी तरह 24 अगस्त की रात बदमाश 02533 पुष्पक एक्सप्रेस को पारीछा होम सिग्नल पर रोक कर स्लीपर कोच में सवार महिला यात्री माधुरी चौधरी के कान का झुमका लूट ले गए थे। महिला उन्नाव से मुंबई के लिए सफर कर रही थी। बदमाशों ने खिड़की में हाथ डालकर वारदात को अंजाम दिया था। पिछले एक महीने सेे जीआरपी और आरपीएफ की 15 टीमें लुटेरों का पता लगाने में लगीं थीं।
बृहस्पतिवार को तड़के उक्त मामले में जीआरपी व आरपीएफ की संयुक्त टीम ने चिरगांव रेलवे स्टेशन के पास से तीन बदमाशों को पकड़ लिया। उनके पास से दो टूटे मंगलसूत्र, एक कान की बाली व घटना में प्रयुक्त दो मोटर साइकिल बरामद की गई। इनके नाम चिरगांव क्षेत्र के खजांची आदिवासी डेरा निवासी बादल पुत्र कन्हैया, जयप्रकाश पुत्र मोहन व आजाद पुत्र कुंवर सिंह हैं। जबकि भानसिंह भागने में सफल रहा।
पुलिस अधीक्षक (रेलवे) मोहम्मद इमरान ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि पकड़े गए बदमाश स्टेशन के आसपास क्षेत्र में प्लास्टिक के फूल बेचने का काम करते हैं। उनके परिवार में कुछ दिन बाद शादी है। शादी में होने वाले खर्चों के लिए बदमाशों ने यात्रियों के साथ लूटपाट की योजना बनाई थी। घटना की रात कई घंटे पहले ही बदमाश मौके पर पहुंच गए थे। पहले से ही अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए थे। बदमाशों ने पहले सिग्नल पर मिट्टी और कपड़ा लगाया और ट्रेन आने के पूर्व पटरी पर सिक्का रखकर सिग्नल फेल कर दिया। कोच की सीढ़ियों पर पैर रखने के बाद बदमाश खिड़की पर लटके और इसके बाद नीचे की बर्थ पर सो रहीं महिला यात्रियों के लगे से मंगलसूत्र व बाली खींच ले गए। इस मौके पर आरपीएफ कमांडेंट आलोक कुमार, सीओ रेलवे नईम खान मंसूरी मौजूद रहे।
चार दिन बाद मनाई थी पार्टी
बदमाशों ने लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने के चार दिन बाद 28 अगस्त को पार्टी मनाई थी। शराब पीते हुए मोबाइल पर फोटो भी खींची थीं। बदमाशों के पकड़े जाने के बाद जब उनके मोबाइलों की जांच की गई तो इस बात का पता लग सका।
तमाम कोशिशों के बाद पकड़े गए लुटेरे
जीआरपी व आरपीएफ के लिए लूटपाट की घटनाओं का खुलासा चुनौती बन गया था। बदमाशों की तलाश में आरपीएफ, जीआरपी, क्राइम ब्रांच व सर्विलांस की 15 टीमें लगीं थीं। अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे थे। ट्रेन में मौजूद 200 से अधिक यात्रियों से पूछताछ की गई। पटरियों पर काम करने वाले ठेकेदार के वर्तमान व पूर्व मजदूरों से पूछताछ की गई। पश्चिम यूपी टीम भेजी गई। टोला प्लाजा से सीसीटीवी फुटेज निकालकर वाहनों की जांच की गई। आसपास के टावरों से एकत्रित 900 से अधिक संदिग्ध नंबरों की एक-एक कर जांच की गई।
गिरफ्तार करने वालों में रहे शामिल
जीआरपी प्रभारी निरीक्षक एसके सिंह, आरपीएफ निरीक्षक क्राइम ब्रांच एसएन पाटीदार, थानाध्यक्ष उरई राजकुमार सिंह, सर्विलांस टीम प्रभारी राजीव कुमार, उपनिरीक्षक संदीप कुमार, नवीन कुमार तिवारी, जयलाल, रवींद्र सिंह राजावत के अलावा सात मुख्य आरक्षी व छह आरक्षी शामिल रहे।