फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे: खर्चों पर चली कैंची, यात्री सुविधाओं ने पकड़ी रफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कोरोना काल के घाटे से जूझ रहे रेलवे ने खर्चों पर कैंची चलाकर करोड़ों रुपये की बचत की है। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद झांसी मंडल में 19 तरह के खर्चों में कमी की गई। रेलवे के सामान्य कार्य खर्च विवरण के मुताबिक वर्ष 2021-22 में तय की गई खर्च सीमा के आधार पर ही खर्चे किए गए। इसके साथ ही रेलवे ने डीजल इंजनों का कम संचालन, स्क्रैप बेचकर भी करोड़ों रुपये की कमाई की। वहीं वर्ष 2022-23 में भी खर्च को कम करने के लिए भी प्लान तैयार कर लिया गया है।
विज्ञापन

दरअसल, मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लगा दिया गया था। इसके चलते ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। धीरे-धीरे अनलॉक में कुछ ट्रेनों को शुरू किया गया। ट्रेनों का संचालन बंद होने से रेलवे को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसे लेकर रेलवे बोर्ड ने पिछले साल 19 तरह के खर्चों में 20 फीसदी तक कटौती करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद झांसी मंडल में विभिन्न तरह के खर्चों की सीमा तय की गई। वर्ष 2019-20 में हुए खर्च के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए विभिन्न मदों की खर्च सीमा (स्पेंडिंग लिमिट) में कटौती की गई। जिसके अनुसार ही रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में खर्चे कर करोड़ों रुपये की बचत की। रेलवे के सामान्य खर्च विवरण पर गौर करें तो मिश्रित खर्च, पेट्रोल के ऑपरेटिंग खर्च, ओवरटाइम, यात्रा भत्ता, विज्ञापन समेत तमाम खर्च की सीमा कम की गई थी।
मद खर्च 2019-20 खर्च सीमा 2021-22
मिश्रित खर्च 77.7 75.79
ऑपरेटिंग खर्च पेट्रोल 542.3 316.64
ओवरटाइम 5.3 3.28
यात्रा भत्ता 32.1 27.13
विज्ञापन (2020-21) 1.52 0.50
आकस्मिक खर्च 7.7 2.07
(करोड़ रुपये में) (स्रोत: एनसीआर इंडियन रेलवे वेबसाइट)
पर्यावरण और राजस्व दोनों बचाए
रेलवे ने खर्चों में कटौती के साथ ही इलेक्ट्रिक इंजनों का अधिक संचालन कर करोड़ों की बचत की। अप्रैल 2022 तक डीजल की खपत कम करके 1.40 करोड़ और नई तकनीक के एबीबी लोकोमोटिव दौड़ाकर 2.48 करोड़ रुपये की बचत की। इसके साथ ही स्क्रैप का निस्तारण कर मार्च 2022 60.74 करोड़ और मई 2022 में माल लदान से 74.21 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। वहीं विशेष टिकट चेकिंग अभियान चलाकर मई 2022 में बिना टिकट 78500 यात्रियों से 5.32 करोड ़रुपये की कमाई की।
विज्ञापन

इन खर्चों में कटौती के थे निर्देश
ओवरटाइम भत्ता, रिवार्ड, घरेलू यात्रा भत्ता, विदेश यात्रा भत्ता, कार्यालय खर्च, रेंट, रेट्स एंड कर, रायल्टी, प्रकाशन, अन्य प्रबंधन खर्च, सप्लाई एंड मेटेरियल, कॉस्ट ऑफ राशन, पेट्रोल एंड ऑयल लुब्रिकेंट, क्लॉथिंग एंड टेंटेज, विज्ञापन और प्रचार, माइनर वर्क मेंटीनेंस, सर्विस चार्ज, सामान्य सहायता अनुदान व अन्य खर्च।
रेलवे किसी तरह की फिजूलखर्ची नहीं कर रहा है। खर्च को कम करके आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खर्च सीमा के मुताबिक ही विभिन्न मदों में खर्च किए गए हैं। नुकसान के बाद भी यात्रियों को सुविधाएं देने की पहल की जा रही है। -मनोज कुमार सिंह, पीआरओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें