झांसी। बिना कनेक्शन दिए ही जलसंस्थान द्वारा दो सौ व्यापारियों की 17 करोड़ रुपये की निकाली गई रिकवरी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जवाब के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। इससे दो सौ व्यापारियों को फौरी राहत मिल गई है। इन व्यापारियों के खिलाफ 17 करोड़ रुपये की रिकवरी जारी की गई है।
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री मुकेश गुप्ता ने बताया कि जलसंस्थान ने मनमाने तरीके से रिकबरी जारी कर दी, जबकि उच्च न्यायालय ने कोरोना के चलते दो अगस्त 2021 तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन भी दिए थे। लेकिन राहत नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें हवाला दिया गया कि जो एक्ट झांसी में लागू ही नहीं है, उसके आधार पर रिकवरी की जा रही हैै। उप्र वाटर सप्लाई एवं सीवरेज एक्ट 1975 के अंतर्गत प्रावधान है कि मकान के आसपास सौ मीटर से निकली पाइप लाइन से कनेक्शन लिया गया हो अथवा नहीं, मकान के वार्षिक मूल्यांकन का 12.5 प्रतिशत जलकर लिया जाएगा। इस आधार पर व्यापारियों की रिकवरी जारी की गई है, जबकि यह एक्ट झांसी में प्रभावी नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर कोर्ट ने रिकवरी पर रोक लगा दी है।
उधर, जलसंस्थान के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने कहा कि उन्हें अभी कोर्ट से आदेश की कॉपी नहीं मिली है। लेकिन, रिकवरी के स्थगन आदेश को लेकर जो तर्क दिया जा रहा है। वह समझ के परे है, क्योंकि शासनादेश केवल लखनऊ के लिए नहीं, पूरे प्रदेश के लिए जारी होता है। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा।