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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: पुजारी और इमाम ने खुद उतारे लाउडस्पीकर, जानें कब से यह शहर सहेजे है सौहार्द की विरासत

Sun, 24 Apr 2022 08:42 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

झांसी महानगर से सटे कस्बा बड़ागांव में एक मंदिर और मस्जिद से लाउडस्पीकर उतर महंत और पुजारी ने सौहार्द की मिसाल दी है। यहां गांधी चौक पर रामजानकी मंदिर स्थित है और इसके पास ही में जामा मस्जिद है।
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झांसी के बड़ागांव स्थित रामजानकी मंदिर व जामा मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गंगा-जमुनी तहजीब के शहर झांसी ने सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल पेश की है। जहां एक ओर लाउडस्पीकर को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है तो वहीं यहां के एक मंदिर और मस्जिद से स्वेच्छा से लाउडस्पीकर उतार लिए गए हैं। मंदिर के पुजारी और मस्जिद के इमाम ने खुद आगे बढ़कर यह काम कर भाईचारे की मिसाल दी है।

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इसकी बानगी झांसी महानगर से सटे कस्बे बड़ागांव में देखने को मिली। यहां गांधी चौक पर रामजानकी मंदिर स्थित है और इसके पास ही में जामा मस्जिद है। मंदिर में सुबह और शाम आरती के दौरान लाउडस्पीकर बजते थे, जबकि मस्जिद में पांचों वक्त की नमाज के समय लाउडस्पीकर का उपयोग होता था। पिछले कई दशकों से यहां ऐसा होता आ रहा था। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच रामजानकी मंदिर के महंत श्याम मोहन दास व मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद ताज आलम ने आगे आकर अपने-अपने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा लिए। अब मंदिर-मस्जिद में बगैर लाउडस्पीकर के प्रयोग के नियमित रूप से अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
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मंदिर के महंत बोले शांति के साथ हो रहे सभी धार्मिक आयोजन 
रामजानकी मंदिर के महंत श्याम मोहन दास का कहना है कि मंदिर में नियमित रूप से सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन हो रहे हैं, लेकिन अब लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। शांति के साथ सभी धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

इमाम ने कहा बिना लाउडस्पीकर हो रही नमाज
जामा मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद ताज आलम ने कहा कि मस्जिद में पिछले कई सालों से दो लाउडस्पीकर लगे हुए थे, जिन्हें उतार दिया गया है। पांचों वक्त की नमाज अब लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किए बगैर की जा रही है।
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