फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसान का बेटा भी बना बड़ा अफसर: इंजीनियरिंग में नहीं लगा मन... पहले प्रयास में ही SDM बने नितेश; ये है लक्ष्य

Sat, 27 Jan 2024 01:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

बुंदेलखंड के युवाओं ने उप्र लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में पहले ही प्रयास में परचम लहराया। परीक्षा पास करके कोई एसडीएम बना तो कोई कोषाधिकारी। किसान का बेटे भी बना बड़ा अफसर बन गया है। मऊरानीपुर के मेधावी नितेश ने पहले ही प्रयास में 22वीं रैंक प्राप्त की है और वो एसडीएम बने हैं।
विज्ञापन
PCS Result - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत और लगन के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। पिछड़े माने जाने वाले बुंदेलखंड के होनहारों ने देश सेवा को लक्ष्य बनाया और अपने कड़े परिश्रम की बदौलत सफलता का शिखर छुआ है। मंगलवार को जारी हुए उप्र लोक सेवा आयोग की प्रशासनिक सेवा परीक्षा में बुंदेलखंड के युवाओं ने पहले ही प्रयास में अपनी काबिलियत का परचम लहराया। 
विज्ञापन


साथ ही बुंदेलखंड और देश के विकास में अहम योगदान देने का संकल्प दोहराया। कोई एसडीएम बना तो कोई कोषाधिकारी। सफलता उनके घर में तो खुशियां लाई हैं। साथ ही बुंदेलखंड से पिछड़ेपन का दाग मिटाने की उम्मीद जगाती हैं। परीक्षा में सफल युवाओं का कहना है कि अब उनका ध्येय अपने देश, प्रदेश और बुंदेलखंड के विकास के लिए काम करना है। 

पहले प्रयास में ही नितेश राज बने एसडीएम
अगर इच्छाशक्ति हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है और सफलता आपके हिस्से में होती है। कुछ इसी मंत्र के साथ पढ़ाई करके जिले के एक मेधावी ने उप्र लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। 
विज्ञापन


मऊरानीपुर निवासी नितेश राज परीक्षा में 22वीं रैंक प्राप्त करके एसडीएम बने हैं। नितेश ने इंजीनियरिंग करने के बाद बड़ी कंपनी में नौकरी के ऑफर छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी का मन बनाया और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। नितेश की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है।

मऊरानीपुर के मोहल्ला नई बस्ती निवासी रजनीकांत के पुत्र नितेश राज की प्रारंभिक शिक्षा मऊरानीपुर में ही हुई। पिता रजनीकांत बताते हैं कि मऊरानीपुर से इंटर करने के बाद उन्होंने आईआईटी प्रयागराज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। बीटेक करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट में उनको कई कंपनियों से नौकरी के ऑफर मिले। 

 

मगर उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने की ठानी। पिता रजनीकांत बताते हैं कि कक्षा नौ में पढ़ाई के दौरान एक शिक्षक ने उनको भविष्य में सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया था। सिविल सेवा की तैयारी करने वह दिल्ली चले गए। यहां उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के साथ पीसीएस परीक्षा की तैयारी की। 

 

मंगलवार को जारी हुए परिणाम में उनको 22वीं रैंक मिली और एसडीएम पद पर उनका चयन हो गया। नितेश के पिता रजनीकांत मऊरानीपुर में छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं। जबकि मां शकुंतला देवी गृहिणी हैं। नितेश के छोटे भाई दीपक फार्मा कंपनी में कार्यरत हैं। जबकि बड़ी बहन नीतू राज पोस्ट ग्रेजुएट और छोटी बहन निधि राज किशोरपुरा प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं।

आईएएस बनना लक्ष्य: नितेश
नितेश राज बताते हैं कि आईएएस बनना लक्ष्य है। इसके लिए निरंतर तैयारी जारी रखेंगे। वे बताते हैं कि पीसीएस परीक्षा के लिए हर टॉपिक को रटने की बजाय समझकर पढ़ना जरूरी है। छोटे-छोटे टॉपिक का रिवीजन करते रहें। साथ ही लगातार पढ़ाई न करें, थोड़ा ब्रेक लेकर पढ़ाई करें। एसडीएम बनने के बाद वे बुंदेलखंड के विकास के लिए काम करना चाहते हैं।

सरिता पहले ही प्रयास में बनीं कोषाधिकारी
झांसी के छोटे से कस्बे रानीपुर की रहने वाली सरिता लिधौरिया ने पहले ही प्रयास में परीक्षा में सफलता हासिल की। 13वीं रैंक प्राप्त करने के साथ ही वह कोषाधिकारी बनी हैं। होनहार बिटिया सरिता का सपना आईएएस बनने का है। सरिता बताती हैं कि दो साल पहले उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। एमएससी रसायन विज्ञान कर चुकीं सरिता के पिता दयाराम लिधौरिया शिक्षक हैं। सरिता बताती हैं कि पीसीएस परीक्षा को लक्ष्य बनाकर पढ़ाई शुरू की थी।

रोज चार घंटे पढ़ाई करने के साथ ही प्रमुख टॉपिक का रिवीजन किया और सफलता पाई। सरिता के छोटे भाई प्रयागराज मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। जबकि चचेरे भाई जितेंद्र चिकित्सक और भाभी संध्या एमडी हैं। उनके चयन पर लक्ष्मन लिधौरिया, कमलेश, गजेंद्र, घनश्याम, रविंद्र, मुकेश, राहुल, जयचंद लिधौरया व नगरवासियों ने खुशी जाहिर कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

 

इंटरव्यू में पूछा निजी और सरकारी शिक्षा में अंतर
सरिता बताती हैं कि मेन्स में उत्तीर्ण होने के बाद जनवरी में ही इंटरव्यू हुआ था। इंटरव्यू में उनसे निजी और सरकारी शिक्षा में अंतर को लेकर सवाल किया गया। साथ ही बुंदेलखंड में शिक्षा के स्तर को लेकर सवाल किए गए। उनका इंटरव्यू करीब 20 मिनट चला।

किसान के बेटे ने भी पाई सफलता
झांसी की गरौठा तहसील के गांव एवनी के किसान पुत्र ने भी पीसीएस परीक्षा में सफलता पाई है। गांव के मानवेंद्र राजपूत छठवीं रैंक पाकर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बने हैं। मानवेंद्र के पिता चंद्रपाल राजपूत गांव में ही खेती करते हैं। मानवेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा गरौठा से ही हुई। इसके बाद उन्होंने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई भी यहीं से की। मानवेंद्र बताते हैं कि गांव में जब चौपाल लगती थी तो अधिकारी आते थे। उनके काम करने का तरीका देखकर मन में अफसर बनने की तमन्ना जागी।

परास्नातक करने के बाद वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली चले गए। कड़ी मेहनत के बाद पहले प्रयास में परीक्षा में सफलता पाई। अगला लक्ष्य आईएएस बनना है। साथ ही अपने बुंदेलखंड और देश के विकास के लिए काम करना है। मानवेंद्र की मां रामदेवी गृहिणी हैं। जबकि छोटे भाई शिवम राजपूत कोटा में नीट की तैयारी कर रहे हैं।
 
विज्ञापन

बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों की समस्या दूर करने के क्या उपाय हैं
मानवेंद्र बताते हैं कि इंटरव्यू में उनसे बुंदेलखंड को लेकर सवाल किए गए। ग्रामीण परिवेश से होने के चलते पैनल ने उनसे बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों की समस्या को दूर करने को लेकर सवाल किया है। जिसका उन्होंने बखूबी जवाब दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें