अब ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकने पर कम समय में अधिक पानी भरा जा सकेगा। वहीं, रेलकर्मी कहीं से भी मैसेज करके पानी के पंप को चालू कर सकेगा। वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन पर रुकने वाली ट्रेनों में पानी भरने के लिए अक्सर पुराने सिस्टम से काफी देर लगती थी।
अब समय के साथ रेलवे ने ट्रेनों में पानी भरने के सिस्टम में सुधार किया है। इसके लिए स्टेशन पर सेंसर से चलने वाला क्विक वाटर सिस्टम लगाया गया है। एक मैसेज पहुंचते ही पंप अपने आप चालू हो जाता है। मैसेज से ही पंप बंद भी हो रहा है।
झांसी स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 115 ट्रेनों के 2,250 रेल कोच के टॉयलेट टैंक में 18 लाख लीटर पानी भरा जाता है। रेलवे ने यहां के वाटर सिस्टम को अपग्रेड किया है। यहां क्विक वाटर सिस्टम लगाया गया है, जो सेंसर से चलता है। इसके लिए मोबाइल से एक कोड मशीन के सेंसर को मैसेज के रूप में भेजना होता है।
मैसेज जाते ही यह सिस्टम अपने आप ही पानी की सप्लाई शुरू कर देता है। इसका लाभ यह है कि इसमें पानी उतना ही जाता है, जितने में टैंक भर सके। जैसे ही टैंक फुल होता है तो वॉटर सिस्टम ऑटोमेटिक बंद हो जाता है। इससे पानी की बर्बादी भी नहीं होती।
एक मिनट चार सेकेंड में भरता है दो सौ लीटर पानी
क्विक वाटर सिस्टम से एक मिनट चार सेकेंड में दो सौ लीटर पानी टैंक में भर जाता है। कई बार पानी का फ्लो कम होने पर थोड़ा समय बढ़ता भी है लेकिन, अधिकांश टैंक में पानी भरने के लिए यह क्विक वॉटर सिस्टम काफी लाभकारी सिद्ध हो रहा है। एक टॉयलेट का वॉटर टैंक सात सौ लीटर का होता है।
आरडीएसओ ने तैयार किया है क्विक वॉटर सिस्टम
ट्रेन के कोच का डिजाइन तैयार करने वाली आरडीएसओ (रिसर्च डेवलपमेंट एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन) ने क्विक वॉटर सिस्टम डिजाइन किया है। पूरी तरह है कंप्यूटर आधारित इस सिस्टम में पंप के पाइपों की क्षमता भी बढ़ाई गई है। पहले जो पाइप चार इंच के होते थे, उन्हें बढ़ाकर अब छह इंच किया गया है।
गर्मी में ट्रेनों में पानी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कम समय में अधिक
पानी भरा जा सके और यात्री सुविधा में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन पर कंप्यूटरीकृत क्विक वाटर सिस्टम लगाया गया है, जिससे तेजी से पानी भरा जा रहा है। -मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी, झांसी।