बुखार, खांसी, उल्टी, जुकाम के मरीजों की तादाद में एकदम से उछाल आया है। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन ओपीडी में 400 में से 150 और जिला अस्पताल में 300 में से लगभग सौ मरीज वायरल के ही आ रहे हैं। स्टाफ के मुताबिक रोजाना 40 से 50 मरीजों को अस्पताल भर्ती करना पड़ रहा है। ऐसे में बेड के लिए वेटिंग शुरू हो गई। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने और जांच कराने तक के लिए मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं।
पुरुष सर्जिकल वार्ड में महिलाओं को भर्ती
कई-कई मरीजों को तो भर्ती होने के लिए एक-दो घंटे से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सर्जिकल और सामान्य बीमारियों के लिए मेल और फीमेल वार्ड अलग-अलग बने हुए हैं। मंगलवार को अस्पताल में हाल ये रहा कि पुरुष सर्जिकल वार्ड में महिलाओं को भर्ती करना पड़ा। वहीं, दूसरी बीमारियों के लिए बने पुरुष वार्ड में भी महिलाएं भर्ती की गईं। इसके अलावा इमरजेंसी से लेकर बच्चा वार्ड तक में बुखार के मरीज भरे पड़े हैं। डेंगू वार्ड में भी छह मरीज भर्ती किए गए।
खून की जांचों की संख्या हो गई दोगुनी
जिला अस्पताल हो या फिर मेडिकल कॉलेज यहां पर खून की जांचें कराने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है। जिला अस्पताल में पहले रोजाना 50 से 55 सीबीसी की जांच होती थी, जो कि इन दिनों 110 लोग करा रहे हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज में भी सौ के आसपास सीबीसी जांच होती थी, जो कि अब 190 से 200 लोग कराने आ रहे हैं।