झांसी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कदम बढ़ाया है। ग्राम पंचायत स्तर पर स्वयं सहायता समूह ने उन दीदियों को सखी बनाने का काम किया है जिन्हें कृषि, पशुपालन, मुर्गी पालन सहित ग्रामीण अंचलों में लघु उद्योग और छोटे व्यापार की समझ है। आर्थिक मजबूती के लिए दीदियां अब चारा और फल उगाएंगी।
भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (ग्रासलैंड) में एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) नेस्वयं सहायता समूह की 55 दीदियों के साथ ही चार परियोजना के स्टाफ को पशुपालन एवं चारा आधारित संतुलित पशु पोषण से संबंधित प्रशिक्षण दिया। उन्हें पशुओं में होने वाले रोग और उसके रोकथाम की भी जानकारी दी गई। महिलाओं को फल, सब्जी एवं फूलों की खेती की जानकारी दी। बताया कि इससे वे अपनी आजीविका में सुधार ला सकती हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, डॉ. गौरेंद्र गुप्ता और डॉ. अविनाश चंद्रा ने 30 पशु सखियों और 25 कृषि सखियों को प्रशिक्षित किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जालौन द्वारा कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को फल, सब्जी और फूलों की खेती की जानकारी देने के साथ ही वर्ष भर लाभ लेने वाली फसलों की जानकारी दी गई ताकि वे स्वावलंबी होने के साथ ही घर की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें। इसी प्रकार पशु सखियों को 300 विभिन्न प्रजाति की घासों के साथ ही कांटा रहित नागफनी तथा संकर हाथी घास उत्पादन की नई तकनीकी की भी जानकारी दी गई तथा उन्हें फार्म पर विजिट भी कराया गया।