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यूं ही नहीं बढ़ी झांसी की 22 फीसदी आबादी, आधों के दो से ज्यादा बच्चे

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झांसी। पिछले दस सालों में यूं ही नहीं झांसी की आबादी 22.49 फीसदी बढ़ गई है। इसके पीछे का बड़ा कारण 50 फीसदी से ज्यादा परिवारों में दो से ज्यादा बच्चे होना है। जिले में भी जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी कोशिशें खोखली साबित हुई हैं। इन्हीं सब वजहों के चलते योगी सरकार को जनसंख्या नियंत्रण कानून लाना पड़ रहा है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले में महिलाओं की संख्या 9,41,167 थी। इनमें से 5,54,832 महिलाओं की शादी हुई। आंकड़ों पर गौर करें तो झांसी में 2,59,113 महिलाओं ने दो से अधिक बच्चों को जन्म दिया। आंकड़ों से स्पष्ट है कि झांसी में जनसंख्या नियंत्रण के बारे में न तो जनता ने सोचा और न ही सरकारी मशीनरी कुछ कर पाई। इसी कारण झांसी में वर्ष 2011 की जनगणना 19,98,603 थी, जो कि अब बढ़कर अनुमानित 24,48,287 पहुंच गई है। पिछले दस सालों में 22.49 फीसदी जनसंख्या में वृद्धि दर्ज हुई है।
टीएफआर में जरूर आ रही कमी
वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे (एएचएस) 2010 के मुताबिक झांसी में टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) 3.7 था। यानी कि महिलाएं तीन से चार बच्चे पैदा कर रही थीं। 2012 में हुए सर्वे में टीएफआर घटकर 2.3 पर पहुंच गया। इसकी रिपोर्ट 2014-15 में आई। यानी कि महिलाएं दो से तीन बच्चे पैदा करने लगीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि आगामी सर्वे की रिपोर्ट में ये आंकड़ा और कम हो सकता है।
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ये हैं आंकड़े
कुल महिलाएं - 9,41,167
शादीशुदा महिलाएं - 5,54,832
कोई बच्चा नहीं - 85,029
दो बच्चे - 1,32,562
तीन बच्चे - 1,09,743
चार बच्चे - 71,941
पांच बच्चे - 36,262
छह बच्चे - 19,343
सात या ज्यादा बच्चे - 21,824
(नोट: आंकड़ा 2011 जनगणना के अनुसार।)
जनगणना 2011 के मुताबिक शादीशुदा 5,54,832 महिलाओं में 2,59,113 के दो से ज्यादा बच्चे थे। हालांकि, एएचएस 2010 की तुलना में 2012 में टीएफआर घटकर 3.7 से 2.3 रह गई। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाना जरूरी है। इससे बेतहाशा तरीके से बढ़ रही जनसंख्या पर रोक लग सकेगी। - ऋषिराज सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक।
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