झांसी। बुंदेलखंड में हजारों की संख्या में गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। लेकिन, शासन ने जिन बिंदुओं पर गोशालाओं का निरीक्षण करवाया है। उनमें से अधिकांश व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली हैं। नोडल अधिकारी डा. एके भट्ट इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
शासन से नामित नोडल अधिकारी मंडलीय प्रयोगशाला अधीक्षक डा. ए के भट्ट ने दस दिन तक जिले की अलग-अलग गोशालाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने गांवों में 34 गोशालाएं देखीं। जिन बिंदुओं पर निरीक्षण करना था, उनमें वर्षा ऋतु में छुट्टा जानवरों के बचाव के क्या प्रबंध हैं, भूसा बैंक की क्या स्थिति है, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत कितने गोवंश को देखरेख में रखा गया है, हरे चारे की व्यवस्था है या नहीं। इन्हीं सब बिदुओं को लेकर नोडल अधिकारी ने 24 जुलाई से तीन अगस्त तक बबीला ब्लाक के ग्राम मानपुर, घिसौली, बड़ोखर, सुकुवां, मोंठ, चिरगांव, बड़ागांव समेत अन्य सभी ब्लाकों की 34 गोशालाओं का निरीक्षण किया।
उन्होंने पाया कि 6656 निराश्रित गोवंश हैं। सभी गोशालाओं में पानी से बचाव के लिए शेड/ त्रिपाल की व्यवस्था है। 6,383 क्विंटल भूसा संरक्षित है। आसपास की 10.5 एकड़ जमीन पर हरे चारे की व्यवस्था है। प्रतिदिन 49 क्विंटल हरा चारा मिल रहा है।149 पशुओं को टैग लगाया गया है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत 34 गोवंश को 27 परिवारों के सुपुर्द किया गया है। इन्हें नौ सौ रुपये प्रति पशु के हिसाब से भरण पोषण भत्ता दिया जाएगा। नोडल अधिकारी गोशालाओं का भ्रमण करके मंगलवार को लखनऊ रवाना हो गए। वह शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि शासन से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसी हिसाब से गोशालाओं मेें सुधार होगा। बता दें कि पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. संतोष कुमार मलिक ने निराश्रित व बेसहारा गोवंशों की सुरक्षा, गो आश्रय स्थलों के सत्यापन, वहां की आवश्यकताओं के आकलन तथा आवश्यक संसाधनों के प्रबंधन से संबंधित सुधार के लिए 10 दिन का अभियान चलाने का निर्देश दिया था।