नवजात की छाती के बाहर धड़क रहा दिल, कहीं नहीं हुआ इलाज
झांसी। ललितपुर में बच्चे के जन्म का दुर्लभ मामला सामने आया है। नवजात का जब जन्म हुआ तो दिल छाती के बाहर धड़कता मिला। इसे देखकर डॉक्टर भी चौंक गए। उन्होंने बच्चे को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। यहां से उसे दिल्ली एम्स भेजा गया। कहीं पर भी इलाज नहीं मिलने की वजह से शनिवार को वह दिल्ली से ललितपुर के लिए चल पड़ा।
ललितपुर के रोड़ा गांव के रहने वाला अरविंद अहिरवार मजदूरी करता है। 25 अगस्त को ललितपुर के महिला अस्पताल में पत्नी बबलेश को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने महिला का सामान्य प्रसव कराया। प्रसव के बाद जन्मे बच्चे को जिस किसी ने भी देखा, वो चौंक गया। बच्चे का दिल छाती के बाहर धड़कता मिला। आनन-फानन डॉक्टरों ने बच्चे को इलाज के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। यहां पर सर्जन नहीं होने के कारण बच्चे को दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। अरविंद के मुताबिक एम्स से डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल भेज दिया। फिर वहां से उसे तीसरे अस्पताल जाने के लिए कहा। वह अस्पताल से अस्पताल भटकता रहा लेकिन किसी ने भी बच्चे को हाथ तक नहीं लगाया। सिर्फ पर्चे पर पर्चे बनते रहे। शनिवार को वह एंबुलेंस से ललितपुर लौटने के लिए दिल्ली से निकल आया। उसका कहना है कि मजदूर होने के चलते उसके पास इलाज के लिए बिल्कुल पैसे नहीं हैं। यदि सरकारी अस्पताल में बेटे का इलाज नहीं होता है तो वो कभी ऑपरेशन नहीं करा पाएगा।
बच्चा मेडिकल कॉलेज आया था। यहां कोई सर्जन नहीं है और केस भी बहुत गंभीर है। इसलिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। बच्चे को इक्टोपिया कोर्डिस जन्म दोष है। ऐसे मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज, झांसी।