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प्यासा रह गया मंडल, सिर्फ 49.70 फीसदी हुई बारिश

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झांसी। इस मानूसनी सीजन में भी झांसी मंडल प्यासा रह गया। अबकी बार पिछले पांच साल से सबसे कम बारिश झांसी में रिकार्ड हुई है। इस मानूसनी सीजन में सर्वाधिक जालौन में जबकि ललितपुर में सबसे कम बारिश दर्ज हुई। हालांकि मप्र के निकटवर्ती इलाकों में हुई बारिश का फायदा मंडल को जरूर मिला है। इस वजह से मंडल में सिर्फ सपरार बांध को छोड़कर सभी बांध पूरी तरह भर गए। सपरार बांध न भर पाने से मऊरानीपुर इलाके मेें सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल दिखाई पड़ रहा है।
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पिछले कई मानसूनी सीजन से बारिश बुंदेलखंड से रूठी हुई है। इस बार भी कुछ ऐसा ही रहा। उत्तर भारत में मानसून ने 15 जून को दस्तक दे दी थी लेकिन झांसी में एक माह बाद तक बारिश की बूंद नहीं टपकी। 20 जुलाई को पहली बार मानसूनी बारिश हुई। इस मानसूनी सीजन में सबसे जोरदार बारिश सिर्फ एक एवं दो अगस्त को ही हुई। उसके बाद पूरे जनपद में सूरज की चटक धूप से लोग बेहाल रहे। मानूसन के दौरान भी तालाबों को भरने के लिए कुछ जगहों पर नहरें चलानी पड़ीं। झमाझम बारिश देखने को भी लोग तरस गए। ब्लॉकवार ही छिटपुट बारिश होती रही। इसके चलते औसत बारिश भी पूरे मंडल में नहीं रिकॉर्ड हो सकी। झांसी में 825 एमएम (मिलीमीटर) बारिश को औसत वर्षा माना गया जबकि ललितपुर में 914 एमएम एवं जालौन में 862 एमएम को औसत बारिश माना जाता है। 15 जून से आरंभ हुए मानसूनी सीजन में 7 सितंबर तक झांसी में सिर्फ 410 एमएम (49.70 प्रतिशत), ललितपुर में 415 (45.40 प्रतिशत) एवं जालौन में 443 (51.39 प्रतिशत) बारिश सिंचाई विभाग ने रिकार्ड की है। मानसून विभाग के जानकारों के मुताबिक पिछले पांच वर्ष के दौरान झांसी में यह सबसे कम बारिश रही है। इसके पहले वर्ष 2015 में यहां सर्वाधिक 787 एमएम बारिश हुई थी हालांकि यह भी औसत वर्षा से कम ही रही थी। मौसम विज्ञानी डॉ. मुकेश चंद के मुताबिक 15 सितंबर तक मानसूनी सीजन माना जाता है लेकिन, अब बारिश की संभावना अधिक नहीं है।
जनपदवार पिछले पांच वर्ष के दौरान हुई बारिश ( मिलीमीटर में)
जनपद 2016 2017 2018 2019 2020 2021
झांसी 476 503 702 593 443 410
जालौन 568 240 500 325 300 443
ललितपुर 750 400 610 475 590 415
राजघाट एवं माताटीला बांध लबालब, सपरार बांध रह गया खाली
बेतवा एवं धसान नदी में मप्र से बरसे पानी से मंडल के सभी बांध में भरपूर पानी आ गया है। इससे झांसी, ललितपुर एवं महोबा को अगले साल तक पीने के पानी के साथ ही सिंचाई के लिए भी पानी मिल सकेगा हालांकि सपरार बांध न भर पाने से मऊरानीपुर इलाके को पानी की समस्या झेलनी पड़ेगी। बांध में पानी न होने से सिंचाई नहीं हो सकेगी। माताटीला एवं पहूज बांध से झांसी में पेयजल एवं सिंचाई की जरूरतें पूरी होती है। सात सितंबर तक माताटीला बांध कुल क्षमता 308.46 मीटर के मुकाबले 308.15 मीटर तक भर गया। यहां 608.72 मिलियन घन मीटर स्टोर कर लिया गया है। इसी तरह राजघाट बांध कुल क्षमता 371 मीटर के मुकाबले 370.90 मीटर भर गया है। मप्र ने कुछ वर्ष पहले सपरार बांध के ऊपर कई चेकडैम बना दिए। अब इस वजह से यह बांध पूरा नहीं भर पाता। बांध के डेड प्वांइट 708.81 फीट है। इस बार बांध 719 फीट ही भर सका। डेडप्वांइट को छोड़कर ही बांध का पानी इस्तेमाल होता है। ऐसे में इतना कम पानी सिर्फ पेयजल के लिए ही इस्तेमाल हो सकेगा।
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