चेहुल्लुम पर मेवाती पुरा की नूर मंजिल के परिसर में मातम करते शिया मुस्लिम। अमर उजाला
झांसी। मंगलवार को हजरत इमाम हुसैन की याद में उनका चेहल्लुम किया गया। इस दौरान जुलूस नहीं निकाले गए लेकिन शहर में शियाओं के घरों में बने अजाखानों में मजलिसें हुईं। इसमें बताया गया कि हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम की खातिर अपने खानदान और साथियों के साथ शहादत दे दी। हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम किया गया।
चेहल्लुम पर ताजिये, बुर्राकें और अखाड़े आदि के जुलूस निकाले जाते थे लेकिन दो साल को कोरोना महामारी की वजह से पाबंदी है। इसलिए इस बार भी जुलूस नहीं निकाले गए। घरों में ही अलम की जियारत कराई गई। मस्जिदों में उलमा ने हजरत हुसैन की शहादत पर तकरीरें की। घरों में महिलाओं ने कुरान-ए-पाक की तिलावत की। शहर में कई जगहों पर लंगर और शरबत का वितरित किया गया।
अंजुमन-ए-अलबिया की ओर से दरीगरान स्थित नूर मंजिल में मजलिस और मातम किया गया। मजलिस में मौलाना हयात ने बताया कि इस्लाम जीओ और जीने दो का मकसद हैै। इस्लाम में सब्र करना सबसे बड़ा मुकाम है। सब्र की वजह से ही दुनिया हजरत इमाम हुसैन को याद कर रही है। कहा कि उनका पैगाम था की बुराई से दूर रहो और गलत की बैयत नहीं करो। अल्लाह ने आजाद पैदा किया है तो आजाद ही रहो। मौलाना शाने हैदर ने बताया कि इस्लाम इंसानियत को तरजीह देता है, धर्म को नहीं। इस्लाम में आतंकवाद की कोई जगह नहीं है। इंसानियत की हमेशा कद्र रहेगी। मजलिस में इमाम हुसैन का पुरसा दिया गया। इस मौके पर सदर सरकार हैदर, तकीयुल हसन आब्दी, आता आब्दी, ताज आब्दी, आसिफ आब्दी, काजिम रजा आब्दी, फुरकान अली, कमर, राजू, हैदर अली आदि मौजूद रहे।